
Bokaro Steel Plant: महीनों से सुलग रही चिंगारी आखिरकार ठंडी पड़ ही गई, जब मांगों और आश्वासनों के बीच समाधान की मेज सजी। समाहरणालय में हुई एक अहम बैठक के बाद विस्थापित अप्रेंटिस संघ ने अपना धरना समाप्त करने का फैसला किया, जिससे बीएसएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
Bokaro Steel Plant: शनिवार का दिन बोकारो के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया, जब बोकारो स्टील प्रबंधन (बीएसएल) और विस्थापित अप्रेंटिस संघ के बीच चल रहा गतिरोध समाप्त हो गया। उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद, संघ ने टू गार्डेन में चल रहे अपने धरने को समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की। इस बैठक में पुलिस अधीक्षक (एसपी) हरविंदर सिंह, अपर समाहर्ता मो. मुमताज अंसारी, और बीएसएल के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।
Bokaro Steel Plant प्रबंधन और विस्थापितों के बीच बनी सहमति
बैठक के दौरान बीएसएल प्रबंधन ने इस बात पर जोर दिया कि प्लांट की स्थापना से लेकर इसके विकास तक में विस्थापितों और स्थानीय बोकारोवासियों का योगदान अविस्मरणीय रहा है। इसी योगदान को सम्मान देते हुए प्रबंधन उनकी समस्याओं के प्रति पूरी तरह गंभीर है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि विस्थापित परिवारों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और उनका समाधान निकालना प्राथमिकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
विस्थापित अप्रेंटिस संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी सभी समस्याओं और मांगों को प्रशासन और प्रबंधन के सामने विस्तार से रखा। काफी देर तक चली चर्चा के बाद, बीएसएल प्रबंधन ने कई मुद्दों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। इसी आश्वासन के बाद आपसी सहमति से धरना समाप्त करने का निर्णय लिया गया। जिला प्रशासन ने भी भविष्य में संवाद के माध्यम से सभी मुद्दों को सुलझाने का भरोसा दिलाया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कृतज्ञता पार्क और संजीवनी योजना की मिली सौगात
इस बैठक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक ‘कृतज्ञता पार्क’ की घोषणा रही। बीएसएल प्रबंधन ने बताया कि विस्थापितों के ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने के लिए सेक्टर-11 में एक भव्य ‘कृतज्ञता पार्क’ का निर्माण किया जाएगा। इस पार्क में बोकारो स्टील के निर्माण में विस्थापितों के योगदान की गाथा को दर्शाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां और बाहर से आने वाले पर्यटक इस इतिहास से परिचित हो सकें।
इसके अलावा, प्रबंधन ने सभी ठेका कर्मियों के लिए ‘संजीवनी योजना’ शुरू करने की भी जानकारी दी। इस योजना के तहत, ठेका पर काम करने वाले कर्मियों को चार लाख रुपये तक के मुफ्त चिकित्सा उपचार की सुविधा मिलेगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह कदम स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में उन्हें बड़ी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा, जो एक लंबे समय से चली आ रही मांग थी। बैठक में इस घोषणा का भी सभी ने स्वागत किया।


