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मार्च, 10, 2026
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Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी 2026: रोगों से मुक्ति का महापर्व और पूजा विधि

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Sheetla Ashtami 2026: सनातन धर्म में शीतला अष्टमी का व्रत और पूजन स्वास्थ्य तथा रोगों से मुक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व माँ शीतला को समर्पित है, जो अपने भक्तों को समस्त शीतलता और आरोग्य प्रदान करती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पावन दिन हर वर्ष चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, यह शुभ तिथि बुधवार, 11 मार्च को पड़ रही है, जब भक्तजन शीतला माता की विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की कामना करेंगे। इस दिन ठंडा भोजन, जिसे बासोड़ा भी कहते हैं, माता को अर्पित करने की परंपरा है।

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Sheetla Ashtami 2026: शीतला अष्टमी 2026 का महत्व और पूजन विधान

शीतला अष्टमी का पर्व भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपरा में गहरा स्थान रखता है। यह विशेष रूप से चेचक, खसरा जैसी बीमारियों से बचाव और आरोग्य के लिए मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी शीतला माता अपने भक्तों को रोगों से रक्षा करती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं। इस दिन शीतला माता की आराधना करने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है।

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शीतला अष्टमी 2026: पूजन विधान

शीतला अष्टमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर लें।
* इसके पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को शुद्ध करें।
* एक दिन पहले बनाया गया बासी भोजन (जैसे पूड़ी, दही-भात, गुलगुले आदि) तैयार रखें।
* माता शीतला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
* माता को रोली, अक्षत, वस्त्र, मेहंदी, काजल, सिक्के और ठंडा जल अर्पित करें।
* विभिन्न प्रकार के बासी पकवानों का भोग लगाएं।
* एक दीपक बिना जलाए ही घी या तेल से भरकर माता के समक्ष रखें (कुछ स्थानों पर दीपक नहीं जलाया जाता है)।
* शीतला माता की कथा का पाठ करें और आरती करें।
* पूरे दिन ठंडा या बासी भोजन ही ग्रहण करें।

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शीतला अष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी बुधवार, 11 मार्च को मनाई जाएगी।

पर्वतिथिदिन
शीतला अष्टमी11 मार्च 2026बुधवार

अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 10 मार्च 2026, मंगलवार, दोपहर 12:45 बजे से
अष्टमी तिथि का समापन: 11 मार्च 2026, बुधवार, सुबह 10:15 बजे तक
उदया तिथि के अनुसार, शीतला अष्टमी का व्रत 11 मार्च 2026 को ही रखा जाएगा।

शीतला अष्टमी की पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार एक राजा के राज्य में लोग चेचक जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। राजा ने चिकित्सकों से उपचार करवाया, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। एक दिन राजा को स्वप्न में माता शीतला के दर्शन हुए, जिन्होंने उन्हें बताया कि यदि वे उनकी पूजा करेंगे और उन्हें ठंडा भोजन अर्पित करेंगे, तो सभी रोग दूर हो जाएंगे। राजा ने ऐसा ही किया और जल्द ही पूरा राज्य रोग मुक्त हो गया। तभी से शीतला अष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

रोगों से मुक्ति के लिए शीतला माता का मंत्र

शीतला अष्टमी के दिन शीतला माता के इस मंत्र का जाप करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के शारीरिक कष्ट दूर होते हैं:

ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।।

या

वन्देऽहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम्।
मार्जनीकलशोपेतं शूर्पालंकृतमस्तकाम्।।

निष्कर्ष एवं उपाय

शीतला अष्टमी का पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का भी प्रतीक है। इस दिन माता की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से शारीरिक और मानसिक शीतलता प्राप्त होती है। माता शीतला के आशीर्वाद से आपके जीवन में आरोग्य और खुशहाली बनी रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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