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मार्च, 9, 2026
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Bokaro News: Women Empowerment की अलख जगाने की अपील, DDC बोलीं – ‘हर घर में जले बराबरी की रोशनी, पापा सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं’

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Women Empowerment: चूल्हा-चौका और ऑफिस की फाइलों के बीच पिसती महिला की कहानी अब पुरानी हो चली है, अब जरूरत है कि घर के हर सदस्य इस बदलाव की मशाल को थामे और हर दिन को महिला दिवस बना दे। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार ने Women Empowerment पर अपनी बात रखते हुए समाज को एक नई दिशा दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि बेटियों को आकांक्षी बनाना और हर परिवार में लिंग समानता का संदेश फैलाना बेहद आवश्यक है।

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Women Empowerment: ‘मुखिया पति’ जैसी कुरीतियों का हो अंत

अपने संबोधन में डीडीसी शताब्दी मजूमदार ने उस सामाजिक कुरीति पर सीधा प्रहार किया, जिसे ‘मुखिया पति’ संस्कृति के रूप में जाना जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह की प्रवृत्तियों को जड़ से समाप्त करना होगा, जहां महिला केवल नाम की प्रधान होती है और असल सत्ता उसके पति के हाथों में होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही यह समझाना होगा कि घर के काम या बाहर की जिम्मेदारियां किसी एक लिंग तक सीमित नहीं हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह सोच बदलनी होगी कि मम्मी केवल रोटी बनाने के लिए हैं और पापा केवल पैसे कमाने के लिए।

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डीडीसी ने आगे कहा कि महिला सशक्तिकरण की असली रोशनी हर घर के आंगन में जलनी चाहिए। इसके लिए परिवार के सभी सदस्यों, चाहे वह बेटा हो या बेटी, सास हो या ननद, सभी को महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। जब तक परिवार में यह बदलाव नहीं आएगा, तब तक सामाजिक बदलाव की उम्मीद करना व्यर्थ है।

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यह भी पढ़ें:  Bokaro News: महिला पुलिसकर्मियों ने संभाला चेकिंग का मोर्चा, एसपी बोले- 'नारी शक्ति किसी से कम नहीं', सड़क पर दिखा अनोखा नज़ारा

परिवार से ही शुरू हो सम्मान की भावना

डीडीसी ने परिवार और समाज से अपील करते हुए कहा कि वे बेटियों को उनके सपनों को पूरा करने और अधिकारों को पाने के लिए प्रेरित करें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि महिलाओं के महत्व को हर कदम पर महसूस किया जाना चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनका स्पष्ट संदेश था कि महिला सशक्तिकरण कोई एक दिवसीय उत्सव नहीं है, बल्कि यह हर घर में प्रतिदिन निभाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इस जिम्मेदारी का निर्वहन करके ही हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर सकते हैं, जहां आने वाली पीढ़ियां समानता और सम्मान की भावना के साथ बड़ी हों। जब हर दिन वुमन डे की तरह मनाया जाएगा, तभी समाज सही मायनों में प्रगति करेगा।

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