
Patna NEET Case: न्याय के गलियारों में फिर से गूंजी एक छात्रा की अनसुलझी दास्तान। पटना नीट केस में मोबाइल की फॉरेंसिक जांच में देरी का पेंच उलझता ही जा रहा है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बार फिर अपनी जांच तेज कर दी है। पटना के बहुचर्चित नीट छात्रा मृत्यु मामले की गुत्थी सुलझाने में मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है, लेकिन इसे भेजने में हुई देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच एजेंसी उन पहलुओं पर गौर कर रही है, जहां कथित तौर पर लापरवाही बरती गई। यह विलंब किसने किया और क्यों, इसका जवाब ढूंढना सीबीआई के लिए महत्वपूर्ण है। सूत्रों के मुताबिक, इसी कड़ी में सीबीआई ने निलंबित थानेदार रोशनी कुमारी और संबंधित एसडीपीओ अनु कुमारी से फिर से पूछताछ की तैयारी कर ली है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Patna NEET Case: जांच का रुख फिर मोड़ा सीबीआई ने
सीबीआई का मानना है कि छात्रा के मोबाइल की समय पर मोबाइल जांच न होने से कई महत्वपूर्ण सुराग मिट गए हो सकते हैं या फिर जांच की दिशा प्रभावित हुई हो सकती है। यह मामला शुरू से ही कई रहस्यों से घिरा रहा है और अब मोबाइल फोन की फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी इसकी जटिलता को और बढ़ा रही है।
पुलिस के शुरुआती रवैये पर भी सवाल उठे थे, जिसके बाद यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था। अब इस विलंब को लेकर संबंधित अधिकारियों पर फिर से शिकंजा कसा जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
फॉरेंसिक रिपोर्ट में देरी: किसकी लापरवाही?
सीबीआई का मुख्य फोकस अब यह पता लगाना है कि मोबाइल को फॉरेंसिक लैब भेजने में जानबूझकर देरी की गई या यह प्रशासनिक चूक का नतीजा था। निलंबित थानेदार और एसडीपीओ से होने वाली यह पूछताछ इस पूरे मोबाइल जांच में देरी के रहस्य से पर्दा उठाने में मदद कर सकती है, जिससे नीट छात्रा के मौत की असली वजह और जिम्मेदार व्यक्तियों का खुलासा हो सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



