
Stock Market: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 9 मार्च को सुबह बाजार खुलते ही मचे कोहराम ने निवेशकों को एक बार फिर इतिहास के उन पन्नों को पलटने पर मजबूर कर दिया, जब घरेलू सूचकांकों ने भारी गिरावट देखी थी। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स 2400 अंक तक टूट गई थी, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। दोपहर करीब 12:08 बजे सेंसेक्स 1886 अंक गिरकर 77,032 पर कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी 50 584 अंक फिसलकर 23,866 के स्तर पर ट्रेड कर रही थी। ऐसी बड़ी गिरावट भारतीय Stock Market के इतिहास में कुछ खास मौकों पर ही देखने को मिली है।
# भारतीय Stock Market: जब इतिहास में बाजार ने लगाई गोते – जानें सबसे बड़ी गिरावटें
## भारतीय Stock Market में हालिया बड़े झटके
हालिया दिनों में शेयर बाजार में गिरावट की बात करें तो, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा टैरिफ लागू करने की वजह से 7 अप्रैल 2025 को सेंसेक्स 2.95 प्रतिशत या 2226.79 अंक टूट गया था। सेंसेक्स ने दिन की समाप्ति 73,137.90 के स्तर पर की थी। वहीं, निफ्टी 50 742.85 अंक या 3.24 फीसदी फिसल गया था। निफ्टी कारोबारी दिन के बंद होने पर 22,161.60 के स्तर पर पहुंच गई थी। उस दिन बीएसई बास्केट के 30 के 30 शेयरों में गिरावट थी। सबसे ज्यादा गिरावट टाटा स्टील के शेयरों में देखने को मिली और यह 7.16 प्रतिशत गिर गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कोविड-19 महामारी के दौरान भी बाजार ने एक बड़ी गिरावट देखी थी। 23 मार्च 2020 को सेंसेक्स में 3,934 प्वाइंट्स की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी, जो करीब 13.15 फीसदी की गिरावट थी। उस दिन सेंसेक्स फिसलकर 25,981.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 50 भी 12.98 फीसदी या 1135.20 अंक फिसल गई थी। इस गिरावट के पीछे सरकार के पूरे देश में लॉकडाउन लागू करने का फैसला था। उस समय कोविड महामारी के असर को लेकर काफी अनिश्चितता थी, जिससे बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली थी।
शेयर बाजार की ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं को समझने के लिए रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। ऐसी अनिश्चितताएं निवेशकों के बीच चिंता पैदा करती हैं, लेकिन बाजार के दीर्घकालिक रुझानों को समझना महत्वपूर्ण है।
## वैश्विक संकट और घोटालों का असर
इससे पहले साल 2008 में ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान घरेलू बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। 21 जनवरी 2008 को सेंसेक्स करीब 7.4 फीसदी या 1,408 प्वाइंट्स टूट गया था। उस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका के कारण निवेशकों में घबराहट बढ़ गई थी, जिससे बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
स्टॉक मार्केट में एक और बड़ी गिरावट 2 मार्च 2001 को भी दर्ज की गई थी। इस दौरान सेंसेक्स 4.13 फीसदी फिसल गया था। उस समय स्टॉक ब्रोकर हर्षद मेहता से जुड़े घोटाले के सामने आने के बाद बाजार में डर का माहौल था। जिसके कारण निवेशकों ने तेजी से अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए थे। इससे पहले 28 अप्रैल 1992 को भी इसी घोटाले के असर से सेंसेक्स एक ही दिन में 12.7 फीसदी टूट गया था। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि बाजार बाहरी और आंतरिक दोनों तरह के झटकों के प्रति कितना संवेदनशील है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



