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मार्च, 12, 2026
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Darbhanga News: 14वीं सदी का केवटी बाढ़ पोखर बना गुमनामी का समंदर, जानिए दरभंगा की इस ऐतिहासिक विरासत का सच…Special Report

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Darbhanga News: सियासत के वादों और फाइलों के बोझ तले जब इतिहास दम तोड़ने लगे, तो समझ लीजिए कि विरासतें सिर्फ तस्वीरों में कैद होने के लिए रह गई हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है केवटी प्रखंड के उस ऐतिहासिक बाढ़ पोखर की, जो आज अपनी पहचान बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बिहार में एनडीए की जीत के बाद स्थानीय लोगों में एक बार फिर यह उम्मीद जगी है कि शायद इस ऐतिहासिक स्थल के दिन फिर बहुरेंगे और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल तेज होगी।

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Darbhanga News: क्या है बाढ़पोखर का गौरवशाली इतिहास?

स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, इस विशाल पोखर का इतिहास चौदहवीं शताब्दी से जुड़ा है, जब तुगलक वंश के शासनकाल में मिथिला पर राजा शिव सिंह का राज था। उस दौरान क्षेत्र में पड़े भीषण अकाल से निपटने, लोगों को रोजगार देने और पेयजल एवं सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राजा ने इस पोखर की खुदाई शुरू करवाई थी। कहा जाता है कि काफी गहराई तक खोदने के बाद भी जब पानी नहीं निकला, तो राजा ने भव्य यज्ञ और पूजा-पाठ का आयोजन किया, जिसके बाद पोखर में जल की धारा फूट पड़ी। एक समय था जब इस पोखर का निर्मल जल आसपास के दर्जनों गांवों के लिए जीवनरेखा था और इसका उपयोग पेयजल से लेकर पूजा-पाठ और सामाजिक कार्यक्रमों तक में होता था।

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Darbhanga News: 14वीं सदी का केवटी बाढ़ पोखर बना गुमनामी का समंदर, जानिए दरभंगा की इस ऐतिहासिक विरासत का सच...Special Report

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लेकिन आज की तस्वीर बिल्कुल उलट है। लगातार अतिक्रमण, भिंडों की कटाई और चारों ओर फैलती गंदगी के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व खो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि सिकुड़ते पोखर क्षेत्र की जमीन का कुछ लोग अब श्मशान के रूप में भी उपयोग करने लगे हैं, जो इस विरासत के प्रति घोर उपेक्षा को दर्शाता है।

यह भी पढ़ें:  Darbhanga News: दरभंगा कोर्ट में गूंजा 'ना', हत्या से लेकर अपहरण तक के 4 बड़े मामलों में जमानत खारिज, अब हाईकोर्ट ही एकमात्र सहारा

अधूरी रह गई पर्यटन स्थल बनाने की कवायद

ऐसा नहीं है कि इस ऐतिहासिक बाढ़पोखर को बचाने और संवारने की कोशिशें नहीं हुईं। कुछ साल पहले तत्कालीन दरभंगा आयुक्त संजीत कुमार की अध्यक्षता में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ी पहल हुई थी। डीएम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों की संयुक्त बैठक में इसके विकास के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बाद आनन-फानन में कुछ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई और पोखर की वास्तविक जलकर भूमि की मापी भी कराई गई। मनरेगा के माध्यम से पोखर के कुछ हिस्सों में भिंडे पर मिट्टीकरण का काम भी शुरू हुआ था, जिससे लोगों में एक उम्मीद जगी थी।

उस दौरान पोखर परिसर में पतंग प्रतियोगिता और नौका विहार जैसी गतिविधियों का आयोजन कराकर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास भी किया गया। लेकिन कुछ समय बाद यह सारी पहल अचानक ठंडे बस्ते में चली गई और विकास कार्य जहां के तहां रुक गए।

मालूम हो कि प्राकृतिक दृष्टिकोण से मनमोहक सौंदर्य और स्वच्छ एवं उपयुक्त वातावरण के लिए प्रसिद्ध उक्त पोखरे का चारो भिन्डे को छोड़कर एक सरकारी आंकड़े के अनुसार वर्तमान में 41 एकड़ जलकर है। बांकी चारों भिन्डे में कुछ अतिक्रमण कारियों के अतिक्रमण का शिकार हो गया। जबकि और जगहों पर सरकार पंचायत भवन, विधालय, अतिपिछड़ा बालिका आवासीय विधालय व अन्य भवन बना हुआ है। सीओ ने लगभग आधे दर्जन अतिक्रमणकारियों को भिन्डे के भुमि को खाली कराने के लिए नोटिस निर्गत किया है।

देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस संबंध में भाजपा विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने कहा कि ऐतिहासिक बाढ़ पोखर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित विभाग को पहले ही पत्र भेजा जा चुका है और संबंधित मंत्री से भी इस विषय पर बातचीत की गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, पूछे जाने पर सीओ भास्कर कुमार मंडल ने भी यही कहा कि बाढ पोखर को पर्यटक स्थल बनाने कि दिशा में आवश्यक पहल जारी है।

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