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मार्च, 10, 2026
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Darbhanga News: खेत पटवन करने गए पिता लौटे नहीं, पोखर में मिली थी लाश, कोर्ट ने हत्यारे को सुनाई 10 साल की सजा

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Darbhanga News: कानून के हाथ लंबे होते हैं, और जब वे किसी अपराधी के गिरेबान तक पहुँचते हैं, तो इंसाफ की कलम अपना फैसला सुना ही देती है। दरभंगा के एक बहुचर्चित मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

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Darbhanga News: क्या है पूरा मामला और कैसे हुई थी हत्या

मामला दरभंगा जिले के अशोक पेपर मिल थानाक्षेत्र के परमार गांव का है। यहां के निवासी नागे सदा की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश नागेश प्रताप सिंह की अदालत ने मंगलवार को अपना अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने मृतक के ही गांव के रहने वाले स्व. कामो मांझी के बेटे रवीन्द्र मांझी को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 23 दिसंबर 2022 की है, जब नागे सदा अपने खेत में पटवन करने गए थे, लेकिन वापस घर नहीं लौटे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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काफी खोजबीन के बाद भी जब उनका कुछ पता नहीं चला, तो मृतक के बेटे राम भरोस सदा ने अशोक पेपर मिल थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी रवीन्द्र मांझी को गिरफ्तार किया, जिसकी निशानदेही पर लक्ष्मीनिया पोखर से नागे सदा का शव बरामद किया गया। इस मामले में सत्रवाद संख्या 289/23 के तहत सुनवाई शुरू हुई और अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 7 गवाहों की गवाही कराई गई, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह माना कि यह एक गैर इरादतन हत्या का मामला है।

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सबूत मिटाने के जुर्म में भी मिली सजा

अदालत ने रवीन्द्र मांझी को भारतीय दंड विधान की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत आठ साल के सश्रम कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अतिरिक्त, अपराध के सबूत मिटाने और शव को गायब करने के प्रयास के लिए धारा 201 के तहत भी उसे दोषी पाया गया। इस धारा में कोर्ट ने दो वर्ष के कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दोषी दोनों धाराओं में निर्धारित अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे क्रमशः तीन-तीन महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

अभियोजन पक्ष का संचालन करने वाले एपीपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट ने इसी साल 9 फरवरी को अभियुक्त को दोषी करार दिया था और मंगलवार को सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। दोषी रवीन्द्र मांझी 28 दिसंबर 2022 से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह फैसला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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