
Veterinary Services: अब बीमार पशुओं का इलाज भी इंसानों की एम्बुलेंस की तर्ज पर होगा, क्योंकि सरकार ने अपनी तिजोरी का मुंह खोल दिया है। राज्य के पशुपालकों को उनके द्वार पर ही बेहतर पशु चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई (MVU) के संचालन नियमों में व्यापक संशोधन किया गया है।
Veterinary Services: बिहार में पशुपालकों के अच्छे दिन आने वाले हैं। अब उन्हें अपने बीमार पशुओं के इलाज के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार ने मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU) के नियमों में ऐसा बदलाव किया है, जिससे पशुओं को घर पर ही तत्काल और बेहतर इलाज मिल सकेगा। इस नई व्यवस्था के तहत, 1962 कॉल सेंटर अब 24×7 संचालित होगा, ताकि पशुपालक दिन हो या रात, किसी भी समय अपने पशुओं के इलाज के लिए मदद मांग सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
क्या हैं नए Veterinary Services के नियम?
नई कार्यान्वयन व्यवस्था के अनुसार, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई के डॉक्टर और कर्मचारी अब प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक अपनी सेवाएं देंगे। उनके काम को दो हिस्सों में बांटा गया है ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके। सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक का समय कॉल सेंटर से मिली शिकायतों के आधार पर पशुओं के इलाज के लिए समर्पित होगा। इस दौरान टीम सीधे कॉल करने वाले पशुपालक के घर पहुंचेगी। वहीं, दोपहर 1:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक प्रत्येक MVU द्वारा पहले से निर्धारित गांवों में विशेष पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पशुओं को लाभ मिल सके।
इस पहल से न केवल पशुओं को समय पर इलाज मिलेगा, बल्कि इससे राज्य में पशुपालन को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य इस सेवा को हर गांव तक पहुंचाना है, ताकि कोई भी पशुपालक सुविधा से वंचित न रहे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
पारदर्शिता और निगरानी पर विशेष जोर
सेवाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए गए हैं। अब दवाइयों की खरीद, उनके वितरण और उपयोग पर जिला स्तर पर एक समिति पैनी नजर रखेगी। प्रत्येक MVU के लिए दवा खरीद की मासिक सीमा 35,000 रुपये तय की गई है, जबकि ईंधन और वाहन की मरम्मत के लिए अधिकतम 33,000 रुपये प्रति माह का बजट निर्धारित किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यही नहीं, सेवाओं की गुणवत्ता की जांच के लिए एक डैशबोर्ड-आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग प्रणाली भी लागू की जाएगी। इससे अधिकारी कहीं से भी बैठकर MVU के काम पर नजर रख सकेंगे। एक और बड़ी सुविधा टेलीमेडिसिन के रूप में दी जा रही है, जिसके माध्यम से पशुपालकों को मोबाइल पर ही दवा की पर्ची (प्रिस्क्रिप्शन) उपलब्ध करा दी जाएगी। बेहतर समन्वय के लिए जिला स्तर पर संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों का एक व्हाट्सऐप समूह भी बनाया जाएगा, ताकि सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान हो सके। इस पूरी कवायद का उद्देश्य बिहार के पशुपालकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ पशु चिकित्सा सेवाएँ देना है, जिससे पशुधन का स्वास्थ्य बेहतर हो और पशुपालन क्षेत्र को मजबूती मिले। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



