
Human Trafficking in Bihar: इंसानियत के सौदागरों के लिए बिहार की धरती अब आग बनने वाली है। बिहार पुलिस ने इन दरिंदों के खिलाफ ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जिससे बच निकलना अब नामुमकिन होगा।Human Trafficking in Bihar को लेकर पुलिस मुख्यालय ने अपनी कमर कस ली है। इसी सिलसिले में आज पटना स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में एक उच्च-स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘टुगेदर अगेंस्ट ट्रैफिकर्स’ विषय पर आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने किया। इस महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन मानव-व्यापार निरोध इकाई और कमजोर वर्ग प्रभाग द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
इस अवसर पर कमजोर वर्ग के अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. अमित कुमार जैन और अपराध अनुसंधान विभाग के पुलिस उप-महानिरीक्षक आमिर जावेद समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के खिलाफ एक ठोस और प्रभावी रणनीति तैयार करना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Human Trafficking in Bihar: ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ का हुआ ऐलान
कार्यशाला के मुख्य वक्ता, एनडीआरएफ के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक डॉ. पी. एम. नायर ने अपने संबोधन में मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को इन अपराधों की जड़ तक पहुंचने और इनसे निपटने के आधुनिक तरीकों से अवगत कराया। इस दौरान पिछले साल 31 जुलाई से 14 अगस्त 2025 तक चलाए गए ऑपरेशन ‘नया सवेरा’ की शानदार सफलता की भी सराहना की गई।
इसी सफलता से उत्साहित होकर बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक और बड़े अभियान की घोषणा की है। दिनांक 01 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक पूरे राज्य में ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ चलाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य नाबालिग लड़कियों को मानव-व्यापार और यौन शोषण के दलदल से बचाना है। यह अभियान मानव व्यापार, बाल श्रम, रेड लाइट एरिया और ऑर्केस्ट्रा ग्रुप से पीड़ितों की मुक्ति और उनके पुनर्वास पर केंद्रित होगा।
क्या है पुलिस का एक्शन प्लान?
‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ के तहत एक सघन और समकालीन अभियान चलाने की तैयारी है। पुलिस की टीमें राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक साथ छापेमारी करेंगी और तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम करेंगी। इस अभियान में केवल पीड़ितों को छुड़ाना ही नहीं, बल्कि उनके पुनर्वास की उचित व्यवस्था करना भी प्राथमिकता होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पुलिस यह सुनिश्चित करेगी कि छुड़ाए गए बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित आश्रय, शिक्षा और कानूनी सहायता मिले ताकि वे समाज की मुख्यधारा में लौट सकें।इस अभियान की सफलता के लिए विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच समन्वय पर जोर दिया जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। पुलिस मुख्यालय का यह कदम दिखाता है कि राज्य में मानव तस्करी और बाल श्रम जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। इस अभियान से अपराधियों के हौसले पस्त होने और पीड़ितों के जीवन में एक नई सुबह आने की उम्मीद है।



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