
Darbhanga News: आसमान से गिरी बूंदें किसी के लिए आफत बन गईं तो किसी के लिए राहत लेकर आईं। दरभंगा के जाले प्रखंड में गुरुवार को हुई बारिश ने दोहरी तस्वीर पेश की है, जहां एक ओर ईंट कारोबारियों के चेहरों पर चिंता की लकीरें खिंच गईं, वहीं किसानों के चेहरे खिल उठे।
Darbhanga News: ईंट भट्ठा मालिकों पर गिरी आफत
प्रखंड क्षेत्र में हुई इस बारिश ने सबसे ज्यादा नुकसान ईंट निर्माण के व्यवसाय से जुड़े लोगों को पहुंचाया है। बेमौसम हुई इस बरसात ने भट्ठों पर पथाई के लिए रखी लाखों कच्ची ईंटों को गला दिया। रतनपुर गांव में ईंट-भट्ठा चलाने वाले व्यवसायी गोपी कृष्ण ठाकुर ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि इस एक दिन की बारिश ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उनके अनुसार, लगभग पांच लाख कच्ची तैयार ईंटें बारिश के कारण खराब हो गईं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि यह हाल सिर्फ उनका नहीं, बल्कि इलाके के सभी ईंट व्यवसायियों का है।
इस अप्रत्याशित बारिश ने कारोबारियों की कमर तोड़ दी है और अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मजदूरों की मेहनत और लागत, दोनों ही पानी में बह गए।
फसलों के लिए वरदान साबित हुई बारिश
जहां ईंट कारोबारियों के लिए यह बारिश आफत बनकर आई, वहीं किसानों के लिए यह अमृत वर्षा साबित हुई है। गनीमत यह रही कि बारिश के साथ तेज हवाएं नहीं चलीं, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) प्रेम नाथ सिंह ने बताया कि यह बेमौसम बारिश रबी फसलों के लिए काफी हद तक फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर किसानों की तोरी और मसूर की फसल कटकर घर आ चुकी है।
खेतों में अभी गेहूं की फसल लगी हुई है, जिसे हवा न चलने के कारण कोई क्षति नहीं पहुंची है। बल्कि, इस बारिश से खेतों में नमी की मात्रा बढ़ गई है, जो मूंग की आगामी बुवाई के लिए बेहद लाभदायक साबित होगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह नमी मूंग के बीजों के अंकुरण में मदद करेगी।
वहीं, प्रखंड बागवानी पदाधिकारी (बीएचओ) अरुण कुमार ने बताया कि यह बारिश उद्यानिक फसलों के लिए भी वरदान है। आम और लीची के पेड़ों पर लगे मंजर बारिश के पानी से धुल गए हैं, जिससे कीड़े-मकौड़े साफ हो गए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे मंजरों से बनने वाले दानों के और भी सुदृढ़ होने की संभावना है, जिससे इस साल अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है।






