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West Bengal Gas Shortage: पश्चिम बंगाल में गैस संकट, ममता का महामार्च, केंद्र पर तीखा प्रहार और जनजीवन का संघर्ष

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West Bengal Gas Shortage: जब रसोई की आग बुझने लगे और वाहनों के पहिये थमने लगें, तब सियासत की आंच और भी तेज़ हो जाती है। पश्चिम बंगाल में कुछ ऐसा ही माहौल है, जहाँ गैस की कमी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।

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पश्चिम बंगाल गैस संकट: बढ़ता संकट और सरकार की चिंता

जानकारी के मुताबिक, यह विशाल विरोध मार्च सोमवार को कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से शुरू होकर एस्प्लानेड के डोरिना क्रॉसिंग तक जाएगा। इस महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी हिस्सा लेंगे, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इस मार्च का मुख्य उद्देश्य रसोई गैस और वाहन गैस की लगातार बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में आ रही गंभीर बाधाओं के विरुद्ध आवाज उठाना है। पार्टी द्वारा जारी पोस्टरों में स्पष्ट किया गया है कि गैस की बेतहाशा बढ़ती दरों और आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न समस्याओं के कारण आम नागरिक भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

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गौरतलब है कि बीते कुछ समय से पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में गैस सिलेंडरों की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सिलेंडर बुकिंग की संख्या कुछ ही दिनों में दो लाख से बढ़कर लगभग छह लाख तक पहुँच गई है, जिससे मौजूदा आपूर्ति व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ गया है। यह स्थिति वास्तव में एक गंभीर पश्चिम बंगाल गैस संकट की ओर इशारा कर रही है।

इस गंभीर मुद्दे पर राज्य सरकार ने केंद्र की नीतियों पर तीखी आलोचना की है। राज्य की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पहले से ही थी, इसके बावजूद केंद्र सरकार ने इससे निपटने के लिए कोई ठोस या पर्याप्त तैयारी नहीं की।

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि भारत के रसोई गैस आयात का एक बड़ा हिस्सा होरमुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, और यह तथ्य पहले से सार्वजनिक जानकारी में था। इसके बावजूद, वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों या रणनीतिक गैस भंडार के निर्माण की दिशा में केंद्र द्वारा कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है। यह दिखाता है कि देश को एक व्यापक रसोई गैस आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य सरकार के प्रयास और विपक्ष के आरोप

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में राज्य के उच्चाधिकारियों और तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई थी। इस बैठक में राज्य की तत्काल ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

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सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि राज्य की रिफाइनरियों में उत्पादित गैस की आपूर्ति को फिलहाल राज्य से बाहर भेजने से रोका जाए। इसका उद्देश्य स्थानीय आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए हैं कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना, आंगनबाड़ी केंद्रों, अस्पतालों और सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति किसी भी तरह से बाधित न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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इस बीच, विपक्ष ने इस पूरे मामले पर राज्य सरकार पर ही प्रश्नचिह्न लगाए हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ दल जानबूझकर एक कृत्रिम संकट पैदा कर रहा है और गैस वितरण प्रणाली को सुनियोजित तरीके से प्रभावित किया जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

इन आरोपों के जवाब में, राज्य सरकार ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि विपक्ष के पास जनता को देने के लिए कोई ठोस उत्तर नहीं है, इसलिए वह केवल बेबुनियाद आरोप लगाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।

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जनता की परेशानियाँ और कालाबाजारी का सच

इस गैस संकट के चलते कई स्थानों पर गैस के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं। वाहन गैस भरवाने के लिए ऑटो चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है। कुछ उपभोक्ताओं ने खुले बाजार में महंगे दामों पर सिलेंडर बेचने की भी शिकायत की है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ इलाकों से गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की खबरें भी सामने आई हैं, जहाँ एक सिलेंडर के लिए लगभग ढाई हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं। यह एक गंभीर रसोई गैस आपूर्ति संकट का संकेत है।

इस बीच, कई सरकारी अस्पतालों को मरीजों के भोजन की व्यवस्था बनाए रखने के लिए निजी सिलेंडरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ अस्पतालों में गैस की कमी की रिपोर्ट भी आई हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

विशेषज्ञों का मत है कि यदि ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित ये समस्याएँ लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो इसका सीधा और गहरा असर आम लोगों के दैनिक जीवन के साथ-साथ राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

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