
Bihar News: कलम जब चलती है तो सियासत भी अदब से सिर झुकाती है, जमुई की धरती पर कुछ ऐसा ही देखने को मिला जब ज्ञान का एक सागर राजनीति के गलियारों तक पहुंचा। मौका था मगध विश्वविद्यालय के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर की बिहार की खेल मंत्री से मुलाकात का, जहां एक किताब चर्चा का केंद्र बन गई।
Bihar News: जानिए क्यों मंत्री ने की प्रोफेसर के भागीरथी प्रयास की सराहना
जमुई जिले के मालवीय नगर, नवडीहा गांव के निवासी और मगध विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर (डॉ.) सुनील कुमार सिंह ने बिहार सरकार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने अपने कई वर्षों के शोध और मेहनत से लिखी पुस्तक “सभी समस्याओं की जड़ आज तक की शिक्षा” उन्हें भेंट की। पुस्तक का शीर्षक और उसकी गहराई देखकर मंत्री श्रेयसी सिंह काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने डॉ. सुनील की विद्वता और उनके इस भागीरथी प्रयास की जमकर सराहना करते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं दीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह मुलाकात केवल एक औपचारिक भेंट नहीं थी, बल्कि इसमें ज्ञान और संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा था।
प्रोफेसर सुनील ने बताया कि यह पुस्तक उनके दो से तीन वर्षों की गहन साधना और परिश्रम का फल है। उन्होंने इस ग्रंथ की रचना के लिए देश के बड़े-बड़े पुस्तकालयों में जाकर अध्ययन किया और प्रामाणिक सामग्री जुटाई। अपने लंबे शिक्षण अनुभव और अध्ययनशीलता को उन्होंने इस पुस्तक में समर्पित भाव से पिरोया है। मंत्री को पुस्तक के उद्देश्य से अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल एक किताब नहीं, बल्कि जनमानस के प्रति श्रद्धा का एक साकार रूप है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
शिक्षा और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज
डॉ. सिंह के अनुसार, यह ग्रंथ न केवल सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में शिक्षा के वास्तविक महत्व को रेखांकित करने वाला एक जीवंत दस्तावेज भी है। खेल मंत्री ने उनके इस समर्पण को प्रेरणास्पद बताया और कहा कि ऐसे अकादमिक कार्यों से समाज को एक नई दिशा मिलती है। प्रोफेसर सिंह ने यह भी जानकारी दी कि वह अपनी दूसरी पुस्तक पर भी काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि वह भी जल्द ही प्रकाशित होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस मुलाकात ने यह साबित कर दिया कि अकादमिक जगत के प्रयास जब राजनीति तक पहुंचते हैं तो उन्हें एक नई पहचान मिलती है।
प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह के इस अकादमिक कार्य से न केवल जमुई जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है, बल्कि उनके पूर्व संस्थान मगध विश्वविद्यालय के प्रबुद्ध जनों में भी हर्ष का माहौल है। उनके स्नेहीजन उन्हें सरस्वती का वरद पुत्र बताते हुए कह रहे हैं कि यह ग्रंथ निश्चित रूप से जनमानस का ज्ञानवर्धन करेगा और शिक्षा पर एक नई बहस को जन्म देगा।



