
Kharmas 2026: सनातन धर्म में खरमास का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं। यह एक ऐसा पवित्र मास है जो आत्म-चिंतन, दान-पुण्य और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष फलदायी होता है।
खरमास 2026: जानिए क्यों वर्जित हैं शुभ कार्य और इसका धार्मिक महत्व
खरमास 2026 का ज्योतिषीय महत्व और वर्जित कार्य
सनातन परंपरा में खरमास को एक विशिष्ट कालखंड के रूप में देखा जाता है, जब मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि में गोचर करते हैं, तब यह स्थिति बनती है, जिसे धनु संक्रांति या खरमास कहा जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं।
वर्ष 2026 में खरमास (मीन संक्रांति) 15 मार्च से शुरू होकर 14 अप्रैल तक रहेगा। 14 मार्च की रात को सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे 15 मार्च से एक महीने के लिए शादी-विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य रुक जाएंगे। यह अवधि आध्यात्मिक साधना, दान और पूजा के लिए उत्तम मानी जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता, क्योंकि सूर्य का बल कमजोर पड़ जाता है। इस दौरान, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु में सूर्य का यह सूर्य गोचर विशेष परिस्थितियों का निर्माण करता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह थोड़ा धीमा हो जाता है। इसलिए यह समय किसी भी नए आरंभ के लिए शुभ नहीं माना जाता है, बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्मशुद्धि के लिए श्रेष्ठ होता है।
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खरमास की पौराणिक कथा और उसका महत्व
खरमास के संबंध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है। भगवान सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड का चक्कर लगाते हैं। निरंतर भ्रमण से उनके घोड़े थक जाते हैं और प्यासे हो जाते हैं। एक बार जब सूर्य देव यात्रा के दौरान एक जलाशय के पास पहुंचे, तो उन्होंने अपने घोड़ों को पानी पिलाने के लिए रोका। जलाशय के पास ही खर (गधा) खड़े थे। सूर्य देव ने अपने घोड़ों को आराम देने और जल पिलाने के लिए खरों (गधों) को अपने रथ में जोत लिया। खरों के चलने की गति धीमी होने के कारण, सूर्य देव का रथ भी धीमा हो गया और वे ऊर्जा विहीन हो गए। इसी कारण खरमास के दौरान सूर्य का तेज कम हो जाता है और शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। यह अवधि दान-पुण्य, पूजा-पाठ, तीर्थ यात्रा और भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
खरमास में क्या करें और क्या न करें
खरमास का समय आध्यात्मिक उत्थान के लिए बहुत उत्तम है। इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए:
क्या करें:
- भगवान विष्णु की उपासना: इस पूरे मास में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा-अर्चना करें।
- दान-पुण्य: गरीब और जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
- तीर्थ यात्रा: पवित्र नदियों में स्नान और तीर्थ स्थलों की यात्रा करें।
- मंत्र जाप: ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन: इस दौरान सात्विक जीवन शैली अपनाएं और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- सत्य बोलना: मन, वचन और कर्म से शुद्ध रहने का प्रयास करें।
क्या न करें:
- विवाह: खरमास में विवाह करना अशुभ माना जाता है।
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या गृह निर्माण का आरंभ न करें।
- मुंडन संस्कार: बच्चों का मुंडन संस्कार इस अवधि में नहीं कराना चाहिए।
- नया व्यवसाय: किसी भी नए व्यवसाय या परियोजना का आरंभ न करें।
- भूमि पूजन: नई भूमि खरीदने या उसका पूजन करने से बचें।
- क्रोध और लोभ: इन अवगुणों से दूर रहें।
खरमास का यह पावन काल हमें सांसारिक मोहमाया से दूर होकर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होने का अवसर प्रदान करता है। इस दौरान ईश्वर की भक्ति में लीन होकर, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।, हम अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण कर सकते हैं। यह अवधि हमें यह स्मरण कराती है कि जीवन में भौतिक सुखों से अधिक आध्यात्मिक संतोष महत्वपूर्ण है। खरमास की समाप्ति के उपरांत पुनः मांगलिक कार्यों का आरंभ होगा, लेकिन तब तक हमें इस अवधि का सदुपयोग अपनी आंतरिक शुद्धि और प्रभु स्मरण में करना चाहिए। इस खरमास 2026 में किए गए आध्यात्मिक प्रयासों से निश्चित रूप से जीवन में सुख-शांति आएगी।







