
LPG Cylinder Shortage: उज्ज्वला योजना की चमक धुएं में खो गई है और आधुनिक रसोई फिर से पुराने दौर में लौट आई है। आलम यह है कि गैस सिलेंडर के इंतजार में गृहणियों के आंसू निकल रहे हैं और चूल्हे की आग जलाने के लिए अब फिर से लकड़ियां खोजी जा रही हैं। कुशेश्वरस्थान पूर्वी क्षेत्र में रसोई गैस की स्थिति इतनी विकट हो गई है कि लोगों को खाना बनाने तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह LPG Cylinder Shortage शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। शहरी इलाकों में जहां लोग इंडक्शन चूल्हे खरीदने को मजबूर हैं, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में जिंदगी दशकों पीछे लौट गई है और महिलाएं फिर से मिट्टी के चूल्हे पर खाना बना रही हैं।

क्यों बढ़ी LPG Cylinder Shortage की यह समस्या?
कुशेश्वरस्थान के गांवों में गैस सिलेंडर समय पर न मिलना एक बड़ी आफत बन गया है। इटहर गांव की रहने वाली शिक्षिका घनश्याम ठाकुर की पत्नी रिना देवी बताती हैं कि जब से गैस चूल्हे पर खाना बनाना शुरू किया था, जिंदगी आसान हो गई थी। बच्चे समय पर स्कूल जा पाते थे। लेकिन अब गैस नहीं मिलने से मजबूरन मिट्टी के चूल्हे पर लौटना पड़ा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। चूल्हा जलाने में ही इतना समय लग जाता है कि बच्चों को स्कूल भेजने में भी देर हो जाती है। यह कहानी सिर्फ रिना देवी की नहीं, बल्कि इलाके की दर्जनों महिलाओं की है जो इस समस्या से जूझ रही हैं।

घरों में चूल्हा जलाने के लिए अब जलावन और कोयले का संकट भी खड़ा हो गया है। गृहणी किरण देवी के अनुसार, अगर गैस सिलेंडर की यह समस्या खत्म नहीं हुई तो पारंपरिक ईंधन पर ही निर्भर रहना होगा। लेकिन अब गांवों में भी पेड़ कम हो गए हैं, जिससे लकड़ी मिलना मुश्किल है। गोबर के गोइठे भी दो रुपये प्रति पीस बिक रहे हैं। रसोई गैस की किल्लत का फायदा उठाकर जलावन बेचने वालों ने भी दाम बढ़ा दिए हैं। ऐसे में गरीब परिवार के लिए इस महंगाई में जलावन खरीदना भी संभव नहीं हो पा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
एजेंसी और प्रशासन का क्या है कहना?
गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं, लेकिन कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बुकिंग कराने के 7 से 10 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है। इस समस्या का मुख्य कारण गैस बुकिंग के नियमों में हुआ बदलाव है। कोशी इंडेन ग्रामीण वितरक, खलासीन के प्रोपराइटर ज्योतिष राज ने बताया कि उनके यहां कुल 12,000 उपभोक्ता हैं। पहले हर दिन करीब 250 सिलेंडर की बुकिंग होती थी। लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बुकिंग का समय 15 दिन से बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, जिससे यह संकट गहरा गया है।
ज्योतिष राज के मुताबिक, एक सिलेंडर ग्रामीण परिवार में 15 से 20 दिन ही चल पाता है। ऐसे में 45 दिन का नियम अव्यवहारिक है और इसी वजह से ग्राहकों में भारी असंतोष है। शुक्रवार को एजेंसी पर 600 ग्राहकों की भीड़ थी, लेकिन गैस केवल 100 लोगों को ही मिल सकी। वहीं, एजेंसी संचालकों का यह भी कहना है कि ऊपर से आपूर्ति भी कम हो रही है। इस गंभीर रसोई गैस की किल्लत को देखते हुए प्रशासन भी हरकत में आया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। किसी भी तरह की अफरा-तफरी को रोकने के लिए पुलिस बल के साथ दंडाधिकारी की नियुक्ति की गई है। मौके पर प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और बीसीओ रंजीत कुमार महतो ने बताया कि कोशी इंडेन पर 342 सिलेंडर आए थे, जिनका वितरण शांतिपूर्ण तरीके से कराया जा रहा है।





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