
Weather Change: मौसम ने ऐसी पलटी मारी है कि समझ नहीं आ रहा चादर ओढ़ें या पंखा चलाएं। दिन में सूरज आग उगल रहा है तो सुबह-शाम की गुलाबी ठंड कंपकंपी छुड़ा रही है। मौसम के इस दोहरे चरित्र का सीधा असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है, जिससे अस्पतालों में मरीजों की कतारें लंबी होती जा रही हैं।
Weather Change से बढ़ी मौसमी बीमारियों की दस्तक
जाले क्षेत्र में मौसम के इस उतार-चढ़ाव ने लोगों को परेशान कर दिया है। दिन में तेज धूप और गर्मी लोगों को पसीना-पसीना कर रही है, वहीं सूरज ढलते ही ठंडक का एहसास होने लगता है। इस बदलाव के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। खासकर, बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम की मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ग्रामीण इलाकों में लोग इस स्थिति को एक पुरानी कहावत “चैता जाड़ हार में लागे, के करिबै वैद्याई” से जोड़कर देख रहे हैं, जिसका मतलब है कि चैत्र महीने की ठंड सीधे हड्डियों तक महसूस होती है और इसका कोई इलाज नहीं होता। इस मौसम में वायरल बुखार का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विवेकानंद झा ने बताया कि दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है, जिससे लोग आसानी से संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उन्होंने कहा कि सुबह और शाम के वक्त हल्की धुंध या कुहासा भी रहता है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है।
डॉक्टर ने दी यह खास सलाह
डॉ. झा ने बदलते मौसम में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सेहत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है। सुबह और शाम घर से बाहर निकलते समय हल्के गर्म कपड़े जरूर पहनें। खान-पान पर विशेष ध्यान दें और ठंडी चीजों, जैसे कि आइसक्रीम या कोल्ड ड्रिंक, से पूरी तरह परहेज करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फ्रिज का ठंडा पानी पीने के बजाय सामान्य या गुनगुना पानी पिएं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर किसी को सर्दी, खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखें तो खुद से कोई दवा न लें। ऐसा करना खतरनाक हो सकता है। तत्काल किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करें और उनकी सलाह पर ही इलाज शुरू करवाएं। इस मौसम में अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है।


