
Egg Prices: पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी तनातनी सिर्फ कूटनीतिक हलकों तक सीमित नहीं, बल्कि अब इसका सीधा असर आपके किचन बजट और भारत के पोल्ट्री बाजार पर भी दिख रहा है। हाल ही में देश में अंडों की कीमतों में अचानक और तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिसके पीछे की मुख्य वजह खाड़ी देशों के साथ व्यापार में आई बाधा है। इस भू-राजनीतिक संघर्ष ने कैसे भारत के अंडे के कारोबार का ‘फंडा’ बिगाड़ दिया है, आइए जानते हैं।
ईरान-इजरायल संघर्ष का सीधा असर: अंडे की कीमतें क्यों गिर रही हैं भारत में?
मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने न सिर्फ तेल बाजार को हिलाया है, बल्कि इसने कृषि उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) को भी प्रभावित किया है। भारत, जो खाड़ी देशों को अंडों का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है, अब इस निर्यात बाधा का खामियाजा भुगत रहा है। घरेलू बाजारों में अतिरिक्त आपूर्ति ने कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे पोल्ट्री किसान चिंतित हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भारत में अंडे की कीमतें में तेज गिरावट: आंकड़े क्या कहते हैं?
देश के प्रमुख बाजारों में अंडों की थोक और खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु के थोक बाजार में जहां एक अंडे की कीमत पहले लगभग 7 रुपये प्रति पीस थी, वहीं अब यह घटकर लगभग 5 रुपये तक आ गई है। इसका मतलब है कि 100 अंडों वाली एक ट्रे अब करीब 500 रुपये में मिल रही है।
- बेंगलुरु थोक बाजार: पहले 7 रुपये/पीस, अब लगभग 5 रुपये/पीस।
- 100 अंडों की ट्रे: लगभग 500 रुपये।
- खुदरा बाजार: पहले 8-9 रुपये/पीस, अब 5.50-6 रुपये/पीस।
यह गिरावट खुदरा बाजार में भी स्पष्ट दिख रही है, जहां पहले एक अंडा 8 से 9 रुपये में बिक रहा था, वहीं अब इसकी कीमत 5.50 से 6 रुपये के बीच पहुंच गई है। इस अप्रत्याशित गिरावट ने उपभोक्ताओं को राहत दी है, लेकिन किसानों के लिए यह चिंता का विषय बन गया है।
निर्यात पर संकट और घटती मांग: दोहरी मार
भारत से हर दिन औसतन 1 करोड़ अंडे खाड़ी देशों को निर्यात किए जाते थे। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, कतर और बहरीन जैसे देश हमारे अंडों के मुख्य खरीदार रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, हाल की सुरक्षा चिंताओं, शिपिंग मार्गों में व्यवधान और परिवहन में आ रही दिक्कतों के कारण इन देशों को होने वाला निर्यात काफी हद तक प्रभावित हुआ है। इस कारण, जो अंडे पहले विदेशी बाजारों में जाते थे, वे अब घरेलू बाजार में अतिरिक्त मात्रा में आ रहे हैं, जिससे आपूर्ति बढ़ गई है और कीमतों पर भारी दबाव बना है।
इसके अतिरिक्त, रमजान के महीने में खाड़ी देशों में खाने-पीने की आदतों में बदलाव देखा जाता है, जिससे अमूमन अंडों की मांग में कमी आती है। निर्यात में कमी और मौसमी मांग में गिरावट के इस दोहरे दबाव ने अंडे की कीमतों को नीचे धकेलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
पोल्ट्री किसानों की बढ़ती चिंता
अंडों के दाम गिरने का सीधा और नकारात्मक असर पोल्ट्री उद्योग से जुड़े किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है। खाड़ी देशों को निर्यात रुकने से उनकी आय पर दबाव बढ़ गया है, क्योंकि घरेलू बाजार में मिलने वाली कीमतें विदेशों में मिलने वाले दाम की बराबरी नहीं कर पा रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खाड़ी देशों के साथ व्यापार और परिवहन की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक भारत में अंडों की कीमतों में खास सुधार की उम्मीद कम है। यह स्थिति छोटे और मझोले पोल्ट्री किसानों के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिन्हें लागत और बिक्री मूल्य के बीच संतुलन बनाए रखने में काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।


