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Bhagalpur News: भक्ति, वीर रस और लोकगीतों की त्रिवेणी में डूबा कहलगांव, Vikramshila Mahotsav में कलाकारों ने बांधा समां

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Vikramshila Mahotsav 2024: कला की कोई सीमा नहीं होती, जब मंच सजता है तो कलाकार अपनी प्रस्तुति से सीधे दिलों में उतर जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा कहलगांव की धरती पर देखने को मिला, जहां महोत्सव के दूसरे दिन सुर, लय और ताल की ऐसी महफिल सजी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

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Vikramshila Mahotsav 2024 में कलाकारों ने बिखेरा जलवा

कहलगांव में चल रहे विक्रमशिला महोत्सव के दूसरे दिन का कार्यक्रम पूरी तरह से स्थानीय कलाकारों के नाम रहा, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीत लिया। कार्यक्रम का शानदार आगाज एबी डांस ग्रुप के कलाकारों द्वारा गणेश वंदना ‘श्री गणेशा देवा’ की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके तुरंत बाद, दिव्या डांस ग्रुप की टीम ने ‘सांसों की माला बोले शुभ स्वागतम’ स्वागत गान से सभी का अभिनंदन किया।

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इसके बाद मंच पर स्थानीय कलाकार विनोद चौबे आए और उन्होंने ‘हां हम बिहारी हैं जी, थोड़ा संस्कारी हैं जी’ जैसी बिहार गाथा प्रस्तुत कर दर्शकों में जोश भर दिया। उन्होंने एक के बाद एक कई लोकप्रिय गीत सुनाए, जिन्होंने लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बाद रेशमी कुमारी ने अपनी रिकॉर्डिंग डांस प्रस्तुति से दर्शकों की वाहवाही लूटी।

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महोत्सव में देशभक्ति का रंग भी खूब चढ़ा। कन्हैया कुमार ग्रुप की टीम ने वीर रस से ओतप्रोत एक देशभक्ति गीत पर ऊर्जावान डांस प्रस्तुत किया। वहीं, नयन कश्यप ने अपनी तिरंगा गीत की प्रस्तुति से लोगों की जमकर तालियां बटोरीं। लोकगीतों की श्रृंखला में जितेंद्र यादव ने ‘हमको छोड़ गैलो सैंया, विदेशवा हो भुलाई गैलो न’ गाकर एक अलग समां बांधा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इसके बाद विशाल कुमार ने किशोर कुमार के सदाबहार गीत ‘जुग जुग प्यार की गीत सुनाता चला’ गाकर पुरानी यादें ताजा कर दीं।

भक्ति, लोकगीत और सूफी अंदाज़ ने मोहा मन

इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में हर तरह के रंग देखने को मिले। अनुपमा कुमारी ने ‘पकी गैले, फुटी गैले गेहूं हो’ गीत प्रस्तुत किया, तो रिमझिम कुमारी ने ‘राम को देखकर जनकनंदनी बाग में जा हुई खड़ी’ भजन से माहौल में भक्ति का रस घोल दिया। रौशन कुमार ने ‘देशवा के शान हो सैंया हमार जवान हो’ गीत से जवानों को सलाम किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वहीं, दिलजीत भागलपुरी ने ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाय के’ सूफी गीत गाकर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया और उन्हें एक अलग ही दुनिया में ले गए।

समस्तीपुर से आए ब्रजेश कुमार ने ‘सोना जैसे चम चम चमके अपनो बिहार हो’ गीत से बिहार का गौरवगान किया। इस महोत्सव में केवल संगीत ही नहीं, बल्कि नाट्य कला का भी प्रदर्शन हुआ। अमुता राज ग्रुप द्वारा छठ पूजा पर आधारित एक नाटक का मंचन किया गया, जिसमें ‘कांच ही बांस के बहंगिया’ और ‘हे छठी मैया’ जैसे गीतों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम के अंत में राज नंदनी ने ‘मेला लगैले बड़ी दूर हो’ और रोहिणी लता ने ‘पंख होती तो उड़ आती रे’ जैसे गीतों पर अपनी मनमोहक प्रस्तुति दी। कुल मिलाकर, महोत्सव का दूसरा दिन स्थानीय प्रतिभाओं के नाम रहा, जिन्होंने अपनी कला से यह साबित कर दिया कि बिहार की धरती कला और संस्कृति से कितनी समृद्ध है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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