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मार्च, 24, 2026
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चैत्र नवरात्र 2026: जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और नवदुर्गा पूजा विधि

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Chaitra Navratri 2026: सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र का अत्यधिक महत्व है, जो मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना का पवित्र पर्व है। यह शक्ति उपासना का वह समय है जब प्रकृति नए जीवन का संचार करती है और भक्त आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर होते हैं। इस वर्ष, 2026 में, चैत्र नवरात्र की शुरुआत 19 मार्च को हो रही है, और यह तिथि कई अद्भुत शुभ योगों से युक्त होकर विशेष पुण्य प्रदान करने वाली है।

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चैत्र नवरात्र 2026: जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और नवदुर्गा पूजा विधि

चैत्र नवरात्र 2026 में बन रहे हैं ये विशेष शुभ योग

यह पर्व वासंतिक नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है और चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। मां दुर्गा के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से की गई पूजा-अर्चना भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस बार, कलश स्थापना के दौरान बनने वाले विभिन्न शुभ योग, जैसे कि अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग, इस नवरात्र को और भी अधिक फलदायी बना रहे हैं। इन शुभ योगों के कारण इस पवित्र काल में की गई हर पूजा, व्रत और अनुष्ठान का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

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यह भी पढ़ें:  चैत्र नवरात्र: दुर्गा सप्तशती के सम्पूर्ण और संपुट पाठ का रहस्य

कलश स्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्र का आरंभ कलश स्थापना के साथ होता है, जिसे घटस्थापना भी कहते हैं। यह नवदुर्गा पूजा का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है।

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से पवित्र करें और चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
  • एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं।
  • इसके ऊपर कलश स्थापित करें, जिसमें गंगाजल, अक्षत, सिक्का, सुपारी, दूर्वा और पुष्प डालें।
  • कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखकर उस पर नारियल रखें, जिसे लाल चुनरी से लपेटकर कलावे से बांधा गया हो।
  • मां दुर्गा का आवाहन करें और ‘ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का जाप करें।
  • इसके बाद सभी देवी-देवताओं का ध्यान करें और दीपक जलाएं।
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तिथिचैत्र शुक्ल प्रतिपदा, गुरुवार
कलश स्थापना मुहूर्तसुबह 06:23 से 07:32 तक (अवधि: 1 घंटा 9 मिनट)
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 12:04 से 12:53 तक

मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना

चैत्र नवरात्र के दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन एक विशेष देवी को समर्पित होता है, जिनकी पूजा से विशेष फल प्राप्त होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

दिनतिथिदेवी स्वरूप
पहला19 मार्च 2026मां शैलपुत्री
दूसरा20 मार्च 2026मां ब्रह्मचारिणी
तीसरा21 मार्च 2026मां चंद्रघंटा
चौथा22 मार्च 2026मां कूष्मांडा
पांचवां23 मार्च 2026मां स्कंदमाता
छठा24 मार्च 2026मां कात्यायनी
सातवां25 मार्च 2026मां कालरात्रि
आठवां26 मार्च 2026मां महागौरी
नौवां27 मार्च 2026मां सिद्धिदात्री

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

यह दुर्गा मंत्र नवरात्र के दौरान विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है।

नवरात्र का महत्व और उपवास के लाभ

नवरात्र के नौ दिन आत्मशुद्धि और साधना के लिए उत्तम माने जाते हैं। इस दौरान उपवास रखने से न केवल शारीरिक शुद्धि होती है, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। भक्तों को चाहिए कि वे इन पवित्र दिनों में सात्विक भोजन करें, मन को शांत रखें और मां दुर्गा के चरणों में अपना ध्यान केंद्रित करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। नवरात्र के अंतिम दिन कन्या पूजन और हवन अवश्य करें ताकि पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त हो सके और मां भगवती का आशीर्वाद सदैव आपके साथ बना रहे। इस प्रकार चैत्र नवरात्र 2026 का यह पर्व आपके जीवन में नई ऊर्जा और खुशहाली लेकर आएगा।

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