
Hardeep Puri Daughter: इंसान की प्रतिष्ठा कांच से भी नाज़ुक होती है, एक ज़रा सी खरोंच भी उसे तोड़ सकती है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी ने अपनी प्रतिष्ठा पर लगे दाग को हटाने के लिए अब अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया सामग्री को हटाने का महत्वपूर्ण आदेश दिया है।
Hardeep Puri Daughter: हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, एपस्टीन मामले से नाम जोड़ने वाली पोस्ट हटाने का निर्देश
Hardeep Puri Daughter: क्या है पूरा मामला?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमायनी पुरी के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उन सभी सोशल मीडिया सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया है, जिसमें हिमायनी पुरी को दोषी अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जोड़ने का प्रयास किया गया था। यह फैसला न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना की पीठ ने सुनाया है।
न्यायालय ने कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को भी इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री को किसी भी रूप में प्रकाशित करने, प्रसारित करने या फैलाने से तत्काल रोक दिया है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो ऑनलाइन मानहानि से निपटने में कानून की गंभीरता को दर्शाता है, और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता खुद पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो संबंधित प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री को स्वयं हटा देंगे या उन तक पहुंच को अवरुद्ध कर देंगे।
हिमायनी पुरी द्वारा दायर मानहानि मामले की सुनवाई करते हुए, अदालत ने पाया कि प्रथम दृष्ट्या मामला उनके पक्ष में मजबूत है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि यदि उन्हें अंतरिम राहत नहीं दी गई, तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। इस प्रकार, अगली सुनवाई की तारीख तक, सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
मानहानि का आधार और एपस्टीन फाइल्स
एपस्टीन फाइल्स, जो हजारों पन्नों के दस्तावेज़ हैं, जेफरी एपस्टीन और उसकी साथी घिसलेन मैक्सवेल द्वारा यौन तस्करी की दो आपराधिक जांचों से संबंधित हैं। इन फाइलों में यात्रा वृत्तांत, रिकॉर्डिंग और ईमेल शामिल हैं, जो 2019 में एपस्टीन की हिरासत में मौत के बाद से लगातार चर्चा का विषय रही हैं। हिमायनी पुरी का आरोप है कि प्रतिवादियों ने इन फाइलों का गलत इस्तेमाल करके उनके खिलाफ एक सुनियोजित सोशल मीडिया मानहानि अभियान चलाया है।
याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादी संख्या 1 से 14 और कई अज्ञात व्यक्तियों ने जानबूझकर संपादित वीडियो, भ्रामक कैप्शन और छेड़छाड़ किए गए थंबनेल जैसे सनसनीखेज और भ्रामक प्रारूपों के माध्यम से इन निराधार आरोपों को फैलाया है। इसका एकमात्र उद्देश्य जनता के आक्रोश को भड़काना, डिजिटल दुनिया में इन्हें वायरल करना और परिणामस्वरूप वादी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
पुरी को भारत और वैश्विक स्तर पर बदनाम करने और उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के इरादे से सुनियोजित और प्रेरित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जैसा कि याचिका में दावा किया गया है। यह स्पष्ट रूप से एक दुर्भावनापूर्ण अभियान का हिस्सा है, और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कोर्ट का सख्त रुख और अगला कदम
याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य हरदीप सिंह पुरी की बेटी होने के कारण, जो स्वयं एक असाधारण रूप से कुशल और आत्मनिर्भर पेशेवर हैं, उन्हें इस तरह के दुर्भावनापूर्ण हमलों का सामना करना पड़ रहा है। यह आरोप दर्शाता है कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर हमला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा हो सकता है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त में सूचीबद्ध की है, तब तक अंतरिम निर्देश प्रभावी रहेंगे। यह मामला साइबर मानहानि और सेलिब्रिटी बच्चों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन अभियानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करेगा।


