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मार्च, 23, 2026
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Chaitra Navratri 2026: खरमास और पंचक के साये में चैत्र नवरात्रि, जानें इसका प्रभाव

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र मास की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले नौ दिवसीय पावन पर्व चैत्र नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह आदि शक्ति मां दुर्गा को समर्पित है, जब भक्त नौ स्वरूपों की आराधना कर असीम कृपा प्राप्त करते हैं। इस वर्ष, 2026 में, यह पवित्र उत्सव एक अनूठी ज्योतिषीय स्थिति के साथ आ रहा है, क्योंकि चैत्र नवरात्रि का आरंभ खरमास और पंचक के मध्य हो रहा है। ऐसे में कई भक्तों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या इस स्थिति का पूजा-पाठ और शुभ कार्यों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है? आइए, देशज टाइम्स बिहार का N0.1 के इस विशेष लेख में हम इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं और जानते हैं कि खरमास व पंचक के साये में कैसे करें मां की आराधना।

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Chaitra Navratri 2026: खरमास और पंचक के साये में चैत्र नवरात्रि, जानें इसका प्रभाव

हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि का पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। यह समय मां दुर्गा की साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। किंतु जब शुभता के इस महापर्व पर खरमास और पंचक जैसे विशेष कालखंडों का संयोग बनता है, तो ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुछ सावधानियां बरतना आवश्यक हो जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Chaitra Navratri 2026: खरमास और पंचक के कारण पूजा-पाठ पर असर

खरमास क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव धनु राशि या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है। इस दौरान सूर्य का बल कमजोर हो जाता है, जिससे शुभ कार्यों में बाधाएं आने की मान्यता है। सामान्यतः खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए व्यापार का आरंभ जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। वर्ष 2026 में, सूर्य लगभग 14 मार्च से 13 अप्रैल तक मीन राशि में रहेंगे, जो खरमास की अवधि होगी।

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पंचक क्या है?
पंचक एक ऐसा ज्योतिषीय योग है जो चंद्रमा के धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों में गोचर करने पर बनता है। यह पांच दिनों की अवधि होती है, जिसे अशुभ माना जाता है। पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों जैसे कि लकड़ी काटना, मकान की छत डालना, शव का अंतिम संस्कार करना (कुछ विशेष विधि के बिना), दक्षिण दिशा की यात्रा करना आदि से बचने की सलाह दी जाती है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 2026 के आरंभ के समय पंचक काल भी प्रभावी रहने की संभावना है। मान लीजिए कि पंचक लगभग 28 मार्च से 01 अप्रैल, 2026 तक रहेगा, जिसके बीच ही चैत्र नवरात्रि का आरंभ होगा।

चैत्र नवरात्रि पर प्रभाव:
हालांकि खरमास और पंचक दोनों को ही ज्योतिष में कुछ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है, परंतु नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्वों पर इसका सीधा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, व्रत, मंत्र जप और देवी की आराधना खरमास या पंचक में वर्जित नहीं होती है। यह कालखंड शुभ संस्कारों जैसे विवाह या गृह प्रवेश के लिए वर्जित है, न कि देव उपासना के लिए। मां दुर्गा की पूजा और घटस्थापना पूर्ण विधि-विधान से की जा सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

चैत्र नवरात्रि 2026: घटस्थापना और पूजा विधि

चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह पर्व घर में सुख-समृद्धि और शांति लाता है।

  • घटस्थापना: नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है। इसके लिए एक मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर नारियल रखा जाता है और उसे शुभ स्थान पर स्थापित किया जाता है।
  • अखंड ज्योति: घटस्थापना के साथ ही अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है, जो नौ दिनों तक जलती रहती है।
  • मां दुर्गा की पूजा: प्रतिदिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसमें आरती, मंत्र जप और दुर्गा सप्तशती का पाठ शामिल है।
  • भोग: मां को प्रतिदिन उनके प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं।
  • कन्या पूजन: अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है, जिसमें नौ कन्याओं को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है।
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चैत्र नवरात्रि 2026: घटस्थापना शुभ मुहूर्त (संभावित)

यहां चैत्र नवरात्रि 2026 के लिए संभावित घटस्थापना मुहूर्त दिए गए हैं, सटीक तिथियों के लिए स्थानीय पंचांग देखें:

तिथिदिनघटस्थापना शुभ मुहूर्त
30 मार्च 2026सोमवारसुबह 06:15 से सुबह 07:15 तक
30 मार्च 2026सोमवारअभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से दोपहर 12:45 तक
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उपाय और सावधानियां

खरमास और पंचक के दौरान मांगलिक कार्यों से भले ही बचा जाता है, लेकिन मां दुर्गा की आराधना के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है। हालांकि, यदि आप विशेष रूप से किसी बड़े शुभ कार्य (जैसे गृह प्रवेश या नया व्यापार) का आरंभ करना चाहते हैं और वह खरमास या पंचक की अवधि में आ रहा है, तो आप इन उपायों पर विचार कर सकते हैं:

  • संकल्प: पूजा आरंभ करने से पूर्व मां दुर्गा के समक्ष अपनी पूजा का संकल्प लें और उन्हें अपनी स्थिति से अवगत कराएं।
  • मंत्र जाप: इस दौरान "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" जैसे नवार्ण मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें।
  • दान-पुण्य: खरमास और पंचक में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें।
  • गायत्री मंत्र: सूर्य के बल को बढ़ाने के लिए गायत्री मंत्र का जाप भी लाभकारी सिद्ध होगा।

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

निष्कर्षतः, चैत्र नवरात्रि 2026 का आरंभ भले ही खरमास और पंचक के मध्य हो रहा हो, परंतु इससे मां दुर्गा की भक्ति और आराधना पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। भक्तगण पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ मां की उपासना कर सकते हैं। केवल उन लौकिक मांगलिक कार्यों से बचें जिन्हें इन अवधियों में वर्जित माना जाता है। मां की कृपा से आपके सभी कष्ट दूर होंगे और घर में सुख-शांति का वास होगा।

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