
Darbhanga News: न्याय के मंदिर से अपराधियों की उम्मीदों पर हथौड़ा चला है, और सलाखों के पीछे जाने का डर अब और भी गहरा हो गया है। दरभंगा सिविल कोर्ट ने एक के बाद एक कई जघन्य मामलों में आरोपियों को कोई राहत न देते हुए उनकी जमानत अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया है।
Darbhanga News: इन गंभीर मामलों में खारिज हुई अग्रिम जमानत
जिला लोक अभियोजक अमरेंद्र नारायण झा से मिली जानकारी के अनुसार, विभिन्न अदालतों ने आधा दर्जन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाओं को नामंजूर कर दिया है, जिससे अब इन अपराधियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। सबसे पहले, अपर सत्र न्यायाधीश सह एससी/एसटी के विशेष न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने एक बड़े ठगी के मामले में सुनवाई की। यह मामला लहेरियासराय थानाकांड संख्या 483/23 से जुड़ा है, जिसमें 13 लाख 40 हजार रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस केस के आरोपी इस्माइल गंज निवासी आदिल अख्तर और फैजुल्लाहखान के रहने वाले सैयद फैज अहमद आलम की अग्रिम जमानत अर्जी को अदालत ने खारिज कर दिया।
इसके अतिरिक्त, सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने दो अलग-अलग मामलों में सख्त रुख अपनाया। पहले मामले में, जो लहेरियासराय थानाकांड संख्या 14/25 के तौर पर दर्ज है, आरोपी सैदनगर अभंडा निवासी विजय यादव पर पुलिस दल पर हमला करने, सरकारी गाड़ी को नुकसान पहुंचाने और पिस्टल छीनने की कोशिश करने जैसे संगीन आरोप थे। कोर्ट ने विजय यादव को कोई राहत नहीं दी। वहीं, एक अन्य मामले में तलवार से जानलेवा हमला करने के आरोप में सिंहवाड़ा थानाकांड संख्या 304/25 के तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई। इन आरोपियों में ललित झा, रौशन झा और मिथिलेश झा शामिल हैं।
अब पटना हाईकोर्ट ही एकमात्र विकल्प
दरभंगा सिविल कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब इन सभी आरोपियों के पास केवल पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचा है। सिविल कोर्ट के इस कड़े रुख से जिले में अपराधियों के बीच एक स्पष्ट संदेश गया है कि जघन्य अपराधों में कानून से बचना आसान नहीं होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन मामलों में आगे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। फिलहाल, सभी आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।



