
Darbhanga News: ज्ञान के मंदिर में जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो इंसानियत का सिर शर्म से झुक जाता है। दरभंगा में एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां महज कुछ रुपयों के लिए एक वार्डन ने सातवीं कक्षा की छात्रा की जान ले ली।
Darbhanga News: दरभंगा एससी/एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश शैलेन्द्र कुमार की अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सातवीं कक्षा की छात्रा की नृशंस हत्या के मामले में एक महिला को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने यह सजा बहेड़ी स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की तत्कालीन वार्डन रेखा सिन्हा को सुनाई। रेखा सिन्हा पटना जिले के पतौना गांव की रहने वाली है और उस पर स्कूल में पढ़ने वाली एससी/एसटी समुदाय की एक बच्ची की हत्या का गंभीर आरोप था।
Darbhanga News: क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला 15 सितंबर 2024 का है, जब कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, बहेड़ी में पढ़ने वाली पतोर थाना क्षेत्र के श्रीरामपिपरा गांव की सातवीं कक्षा की एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद मृतका के पिता ने बहेड़ी थाने में एक लिखित आवेदन देकर हॉस्टल वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया था कि वार्डन रेखा सिन्हा के पर्स से एक हजार रुपये चोरी हो गए थे, जो बाद में उनकी बेटी के पास से बरामद हुए। इसी बात से नाराज होकर वार्डन ने पूछताछ के दौरान बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और शिक्षा जगत को शर्मसार कर दिया था।
पुलिस ने पिता के आवेदन के आधार पर बहेड़ी थाना कांड संख्या 326/24 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इस जघन्य छात्रा की हत्या के मामले में अभियोजन पक्ष ने अपनी दलीलें मजबूती से रखीं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विचारण के दौरान, जांच अधिकारी (IO) और डॉक्टर समेत कुल 6 गवाहों की गवाही कराई गई, जिसने केस को अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अदालत ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा
एससी/एसटी वाद संख्या 03/25 में चली सुनवाई के बाद अदालत ने गत 10 मार्च को ही आरोपी वार्डन रेखा सिन्हा को बीएनएस की धारा 108 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया था। मंगलवार को सजा के बिंदु पर अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाया। विशेष लोक अभियोजक संजीव कुमार कुंवर ने अभियोजन पक्ष का संचालन किया।
अदालत ने दोषी वार्डन को बीएनएस की धारा 108 के तहत 10 वर्षों के कठोर कारावास और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत आजीवन सश्रम कारावास की सजा मुकर्रर की है। यह एक सराहनीय बात है कि अदालत ने महज एक साल पांच महीने के भीतर इस गंभीर मामले की सुनवाई पूरी कर जघन्य अपराध करने वाली दोषी को उसके किए की सजा दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस फैसले से न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।





