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मार्च, 18, 2026
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चैत्र नवरात्रि 2026: इन शुभ रंगों में करें माँ दुर्गा का पूजन, मिलेगा अखंड सौभाग्य

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व, जो माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित है, सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन नौ दिनों में प्रत्येक तिथि पर विशिष्ट रंग के वस्त्र धारण करने का विधान है, जिससे साधकों को माँ का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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चैत्र नवरात्रि 2026: इन शुभ रंगों में करें माँ दुर्गा का पूजन, मिलेगा अखंड सौभाग्य

चैत्र नवरात्रि 2026 के नौ दिन और उनके शुभ रंग का महत्व

यह पर्व न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर है, बल्कि यह प्रकृति के नए चक्र का भी प्रतीक है। इन दिनों में ग्रहों की स्थिति और ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं विशेष रूप से अनुकूल होती हैं। माँ दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप से संबंधित विशेष शुभ रंग को धारण करने से जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह माना जाता है कि इन रंगों का प्रयोग करने से माँ भगवती शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

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प्रथम दिन (प्रतिपदा) – माँ शैलपुत्री: लाल रंग

नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। इस दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लाल रंग ऊर्जा, शक्ति, साहस और प्रेम का प्रतीक है। यह माँ दुर्गा के प्रचंड स्वरूप को दर्शाता है और भक्तों में उत्साह का संचार करता है।

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द्वितीय दिन (द्वितीया) – माँ ब्रह्मचारिणी: शाही नीला रंग

दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। शाही नीला रंग शांति, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है। यह भक्तों को संयम और ज्ञान की प्राप्ति में सहायता करता है। यह रंग आध्यात्मिक गहराइयों और दिव्य शक्ति का आभास कराता है।

तृतीय दिन (तृतीया) – माँ चंद्रघंटा: पीला रंग

तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। पीला रंग खुशी, आशावाद, ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक है। यह भक्तों के जीवन में प्रसन्नता और चमक लाता है। इस रंग के वस्त्र धारण करने से माँ चंद्रघंटा की कृपा से भय और संकट दूर होते हैं।

चतुर्थ दिन (चतुर्थी) – माँ कूष्मांडा: हरा रंग

चौथे दिन माँ कूष्मांडा की उपासना की जाती है। हरा रंग प्रकृति, विकास, उर्वरता और नवीनीकरण का प्रतीक है। यह जीवन में नई ऊर्जा और खुशहाली लाता है। इस रंग को धारण करने से माँ कूष्मांडा आरोग्य और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

पंचम दिन (पंचमी) – माँ स्कंदमाता: ग्रे/धूसर रंग

पांचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा होती है। ग्रे या धूसर रंग परिवर्तन, संतुलन और संयम का प्रतीक है। यह भक्तों को जीवन के उतार-चढ़ाव में स्थिरता बनाए रखने की प्रेरणा देता है। यह रंग माँ के मातृत्व और सुरक्षा का भाव भी दर्शाता है।

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षष्ठम दिन (षष्ठी) – माँ कात्यायनी: नारंगी रंग

छठे दिन माँ कात्यायनी की आराधना की जाती है। नारंगी रंग ऊर्जा, रचनात्मकता, सकारात्मकता और उत्साह का प्रतीक है। यह भक्तों के जीवन में उमंग और स्फूर्ति भर देता है। इस रंग के वस्त्र धारण करने से माँ कात्यायनी की कृपा से सभी बाधाएं दूर होती हैं।

सप्तम दिन (सप्तमी) – माँ कालरात्रि: सफेद रंग

सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है। सफेद रंग शांति, पवित्रता, शुद्धता और सादगी का प्रतीक है। यह भक्तों को भयमुक्त कर शांति प्रदान करता है। माँ कालरात्रि का यह स्वरूप भक्तों को सभी नकारात्मक शक्तियों से बचाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

अष्टम दिन (अष्टमी) – माँ महागौरी: गुलाबी रंग

आठवें दिन माँ महागौरी की उपासना की जाती है, जिसे महाअष्टमी भी कहते हैं। गुलाबी रंग प्रेम, करुणा, स्त्रीत्व और सौहार्द का प्रतीक है। यह भक्तों के जीवन में प्रेम और स्नेह भर देता है। माँ महागौरी की कृपा से अखंड सौभाग्य और सुख की प्राप्ति होती है।

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नवम दिन (नवमी) – माँ सिद्धिदात्री: मोरपंखी हरा (पीकॉक ग्रीन) रंग

नवरात्रि के अंतिम दिन, नवमी पर माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है। मोरपंखी हरा रंग (या बैंगनी) ज्ञान, आध्यात्मिकता और अद्वितीयता का प्रतीक है। यह भक्तों को सभी सिद्धियां प्रदान करता है और उन्हें आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

इस प्रकार, चैत्र नवरात्रि 2026 में इन शुभ रंगों का पालन कर माँ दुर्गा की उपासना करने से जीवन में सकारात्मकता, सुख और समृद्धि का आगमन होता है। यह परंपरा न केवल हमारी संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, बल्कि यह हमें प्रकृति और ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं से जुड़ने का अवसर भी देती है। इन नियमों का पालन करते हुए सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा निश्चित रूप से फलदायी होती है।

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