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Chaitra Navratri 2026: हिंदू नववर्ष का दिव्य आरंभ और मां दुर्गा का पूजन

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Chaitra Navratri 2026
Chaitra Navratri 2026: हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नववर्ष का पावन आरंभ होता है, और इसी के साथ नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति और भक्ति के महापर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। यह दिव्य दिवस न केवल विक्रम संवत के नवीन अध्याय का सूत्रपात करता है, बल्कि इसे सृष्टि के सृजन और आदिशक्ति मां दुर्गा की उपासना का महापर्व भी माना जाता है।

Chaitra Navratri 2026: हिंदू नववर्ष का दिव्य आरंभ और मां दुर्गा का पूजन


Chaitra Navratri 2026 और हिंदू नववर्ष का महत्व


यह वह पुण्यकाल है जब प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरमोत्कर्ष पर होती है। इस पावन अवसर पर भक्तगण मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना कर उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि का ज्योतिषीय और पौराणिक महत्व अद्वितीय है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यह दिन सृष्टि निर्माण और समस्त देवी-देवताओं की शक्ति पूजा के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विक्रम संवत की शुरुआत भी इसी तिथि से होती है, जो भारतीय कालगणना का एक महत्वपूर्ण आधार है। इस दौरान किए गए व्रत, अनुष्ठान और साधना से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है। यह पर्व आध्यात्मिक शुद्धि और आंतरिक शक्ति पूजा को जागृत करने का अवसर प्रदान करता है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

चैत्र नवरात्रि पूजन विधि:

  • प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को शुद्ध करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
  • एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • कलश स्थापना करें (घटस्थापना विधि का पालन करते हुए)।
  • मां को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और मां के मंत्रों का जाप करें।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥

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चैत्र नवरात्रि का समापन रामनवमी के साथ होता है, जो भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पूरा कालखंड आत्मचिंतन, साधना और दैवीय कृपा प्राप्त करने का अनुपम अवसर है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की सच्चे मन से की गई उपासना सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती है और जीवन में सकारात्मकता लाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन दिनों में कन्या पूजन और दान का विशेष महत्व है, जिससे मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

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