
Silver Price: सोना और चांदी दोनों को ही कीमती धातुओं में गिना जाता है और निवेश से लेकर गहनों तक में इनका इस्तेमाल होता है। निवेशक भी बाजार के उथल-पुथल के बीच सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर इनकी ओर रुख करते हैं। फिर भी जब कीमत की बात आती है, तो दोनों के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सोने की तुलना में चांदी काफी सस्ती नजर आती है, लेकिन ऐसा क्यों है? आइए जानते हैं उन अहम वजहों को जो सोने और चांदी की कीमतों में इस बड़े फर्क को बनाए रखती हैं।
क्यों सोना महंगा और Silver Price क्यों सस्ता? जानिए बड़े कारण!
Silver Price: औद्योगिक मांग और उपलब्धता का खेल
चांदी के बाजार आकार को सोने के लिहाज से काफी छोटा माना जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक कीमती धातुओं के बाजार में चांदी का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ही है, जबकि सोने में ज्यादा निवेश और ट्रेडिंग होती है। यह सोने को एक मजबूत और भरोसेमंद निवेश विकल्प बनाता है। यही वजह है कि अनिश्चित आर्थिक हालात में लोग सोने की ओर ज्यादा रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमत ऊंची बनी रहती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सोने की तुलना में चांदी की उपलब्धता भी कहीं ज्यादा है, जो इसकी कीमतों में फर्क का एक मुख्य कारण है। सोने की खुदाई का तरीका काफी कठिन और खर्चीला होता है, क्योंकि इसे जमीन की गहराई से विशेष तरीकों से निकाला जाता है। वहीं चांदी कई बार तांबा, जस्ता या सीसा जैसी अन्य धातुओं के खनन के दौरान साथ में ही मिल जाती है। इससे इसकी अलग से खनन लागत कम पड़ती है। यही वजह है कि उत्पादन खर्च कम होने के कारण चांदी की कीमत सोने के मुकाबले कम रहती है।
इसके अतिरिक्त, चांदी का इस्तेमाल उद्योगों में ज्यादा होता है और इसकी मांग सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी रहती है। जब अर्थव्यवस्था धीमी पड़ती है या वैश्विक हालात प्रभावित होते हैं, तो चांदी की औद्योगिक मांग पर असर पड़ता है और इसकी कीमतें जल्दी नीचे आ सकती हैं। यही कारण है कि सोने की तुलना में चांदी आमतौर पर सस्ती रहती है और उसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव भी देखने को नहीं मिलता है, हालांकि पिछले कुछ दिनों में इसमें कुछ तेजी दिखी है।
केंद्रीय बैंकों की नीति और कीमती धातुएं
दुनिया के ज्यादातर केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोने को बड़ी मात्रा में रखते हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बनी रहती है और कीमतें भी ऊंची होती हैं। सोना एक पारंपरिक सुरक्षित निवेश माना जाता है और यह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वहीं दूसरी ओर, चांदी को अब केंद्रीय बैंकों के आधिकारिक भंडार में ज्यादा जगह नहीं मिलती, जिसके कारण इसकी मांग उतनी मजबूत नहीं रहती और यह सोने के मुकाबले सस्ती बनी रहती है। यही वजह है कि सोने को वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक मजबूत आधार मिलता है, जबकि चांदी को औद्योगिक मांग और सीमित निवेश समर्थन पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है।
सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में अक्सर तेज बदलाव देखने को मिलता है। कई बाहरी और बाजार से जुड़ी वजहें इसका कारण होती हैं। आर्थिक हालात में बदलाव, मांग और सप्लाई का संतुलन बिगड़ना, निवेशकों की सोच और बाजार के मौजूदा हालात ये सभी चीजें मिलकर इनके दाम तय करने का काम करती हैं। साथ ही सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स भी कीमती धातुओं की कीमतों को ऊपर-नीचे करते हैं। इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव से इन बहुमूल्य धातुओं के दाम बदलते रहते हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/business/ आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



