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मार्च, 24, 2026
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Navratri Kanya Pujan: सुख-समृद्धि और शांति का आगमन नवरात्रि पर कन्या पूजन, जानिए -महत्व, विधि और शास्त्रों का रहस्य

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Navratri Kanya Pujan: नवरात्रि के पावन अवसर पर कन्या पूजन का अत्यंत विशेष महत्व है। यह पवित्र अनुष्ठान आदिशक्ति माँ दुर्गा को प्रसन्न करने का एक महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है, जिससे भक्त के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है।

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नवरात्रि कन्या पूजन: महत्व, विधि और शास्त्रों का रहस्य

नवरात्रि कन्या पूजन: कन्याओं के दिव्य स्वरूप का सम्मान

Navratri Kanya Pujan: नवरात्रि के पावन पर्व में कुमारी कन्याओं का पूजन सनातन धर्म में अत्यंत पूजनीय माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, 2 से 9 वर्ष की कन्याओं के पूजन से साक्षात देवी प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। यह श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन कन्याओं को माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना जाता है, और उनकी सेवा से समस्त इच्छाएं पूर्ण होती हैं। इस पवित्र अवसर पर देवी पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

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कन्या पूजन की विधि:

* सबसे पहले कन्याओं को आदरपूर्वक घर आमंत्रित करें और स्वच्छ स्थान पर बिठाएं।
* उनके चरण जल से धोकर वस्त्र या तौलिए से पोंछें।
* सभी कन्याओं को रोली, अक्षत (चावल) का टीका लगाएं और कलावा बांधें।
* माँ दुर्गा का ध्यान करते हुए उनकी आरती उतारें।
* उन्हें श्रद्धापूर्वक पूड़ी, चना, हलवा और अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसें।
* भोजनोपरांत अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा और उपहार भेंट करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* अंत में उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और प्रेमपूर्वक विदा करें।

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कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त (एक सामान्य अवलोकन):

| अनुष्ठान | समय |
|—|—|
| कन्याओं का आगमन | प्रातः 09:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक |
| पूजन एवं भोजन | दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक |
| विदाई | दोपहर 02:00 बजे के उपरांत |

कन्या पूजन का आध्यात्मिक महत्व:

नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। कन्या पूजन इस उपासना का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण है, विशेषकर अष्टमी और नवमी तिथि पर। यह माना जाता है कि इन कन्याओं में साक्षात देवी शक्ति का वास होता है। उनकी पूजा से माँ दुर्गा तत्काल प्रसन्न होती हैं और भक्त को बल, बुद्धि, विद्या और मोक्ष प्रदान करती हैं। यह परंपरा हमें नारी शक्ति का सम्मान करना भी सिखाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

पूजन हेतु मंत्र:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

निष्कर्ष एवं उपाय:

कन्या पूजन केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी गरिमा और ईश्वरीय शक्ति के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रकटीकरण है। इस पवित्र कार्य को सच्चे मन से करने पर भक्त को सभी प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक सुखों की प्राप्ति होती है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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