
Bihar Ethanol Crisis: बिहार में इथेनॉल उद्योग का भविष्य सवालों के घेरे में है, जहां एक ओर नई संभावनाओं के द्वार खुलने थे, वहीं अब बंदी का ग्रहण लग गया है। यह संकट सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों और अन्नदाताओं की उम्मीदों पर भी भारी पड़ रहा है।
बिहार इथेनॉल संकट: 10 प्लांट बंद, हजारों नौकरियां दांव पर, अन्नदाता भी हलकान
बिहार इथेनॉल संकट की जड़ें: क्यों थम गया उत्पादन?
बिहार में अनाज आधारित इथेनॉल उत्पादन इकाइयां गहरे संकट से जूझ रही हैं। राज्य के दस प्रमुख इथेनॉल प्लांट या तो बंद हो चुके हैं या बंदी की कगार पर हैं। इस स्थिति ने उद्योग जगत, रोजगार बाजार और खासकर मक्का उत्पादक किसानों पर गंभीर प्रभाव डाला है। प्लांट बंद होने के पीछे मुख्य कारण इथेनॉल आपूर्ति में 50 से 55 प्रतिशत की कटौती और तेल कंपनियों द्वारा इथेनॉल खरीद से मुंह मोड़ना बताया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी वजह से बक्सर जिले के नवानगर स्थित एक इथेनॉल प्लांट को 17 मार्च से एक महीने के लिए बंद कर दिया गया है। प्रबंधन ने सभी कर्मचारियों को अवकाश पर भेज दिया है। अब इस प्लांट का संचालन अगली तिमाही (मई से जुलाई) के संभावित आदेश पर निर्भर करेगा।
सूत्रों की मानें तो यह समस्या किसी एक प्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के लगभग सभी इथेनॉल प्लांट ऐसी ही चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। जानकारी मिली है कि नवंबर 2025 से तेल विपणन कंपनियों ने बिहार से इथेनॉल की खरीद में उल्लेखनीय कमी की है, जबकि अन्य राज्यों से खरीद जारी रखी गई है। इस भेदभावपूर्ण नीति के कारण बिहार के उद्योगों को भारी आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
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सरकार से गुहार, पर बेअसर: लाखों का भविष्य अंधकार में
बिहार के इथेनॉल प्लांट मालिकों ने इस मुद्दे को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के कई उच्च पदस्थ अधिकारियों और राजनेताओं से लगातार संपर्क किया है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री के साथ-साथ केंद्र में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री और पेट्रोलियम सचिव तक को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
इस संकट का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ा है। इथेनॉल प्लांटों के बंद होने से बिहार में 10,000 से अधिक लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, मक्का उत्पादक मक्का किसान को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि इथेनॉल उत्पादन में मक्का एक प्रमुख कच्चा माल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अनिश्चितता ने न सिर्फ औद्योगिक विकास को झटका दिया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले मक्का किसान की आजीविका पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।



