
धुरंधर: ‘रिवेंज’ ने हिला डाला बॉक्स ऑफिस, क्या है रणवीर सिंह की करियर बेस्ट फिल्म का पूरा सच!
धुरंधर का धमाकेदार आगाज़: कहानी की गहराई और एक्शन का तूफान
‘धुरंधर द रिवेंज’ सिर्फ एक एक्शन फिल्म नहीं, ये बदले की वो कहानी है जो आपको अपनी सीट से हिलने नहीं देगी। इस बार आदित्य धर हमें जसकीरत सिंह रंगी के हमजा अली मजारी बनने की यात्रा पर ले जाते हैं, पाकिस्तान की उन गुप्त गलियों में जहां आतंकवाद का बीज बोया जाता है। फिल्म का हर फ्रेम इस कहानी को गढ़ने में की गई मेहनत को दर्शाता है। यह एक ऐसा सिनेमेटिक एक्सपीरियंस है जो आपको भारत-पाकिस्तान के संवेदनशील रिश्तों और उसके गहरे असर को महसूस कराता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फिल्म की शुरुआत एक दमदार डायलॉग से होती है, जो इसके दर्द भरे सफर को बयां करता है, और यकीन मानिए, फिल्म इस पर पूरी तरह खरी उतरती है। 4 घंटे की लंबी अवधि के बावजूद, यह आपको बांधे रखती है, हर छोटी से छोटी डिटेल पर काम किया गया है।
अभिनय की धुरंधर जंग: रणवीर सिंह ने रच दिया इतिहास!
अगर आप रणवीर सिंह को ‘पद्मावत’ के खिलजी के रूप में जानते हैं, तो ‘धुरंधर’ में वे आपको एक नए अवतार में चौंका देंगे। उन्होंने इस किरदार में अपनी आत्मा डाल दी है, अपने करियर की सबसे बड़ी लकीर खींच दी है। उनका हर अंग अभिनय करता है, और यह देखने लायक है। फिल्म की Star Cast में हर अभिनेता ने अपनी छाप छोड़ी है।
- रणवीर सिंह: करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, ‘खिलजी’ को भुला देंगे।
- अर्जुन रामपाल: खूंखार और यादगार किरदार में, पहले कभी नहीं देखा गया।
- माधवन: हर भूमिका में चौंकाने की अपनी आदत को बरकरार रखा।
- संजय दत्त: अपनी उपस्थिति से कमाल कर दिया।
- सारा अर्जुन: भविष्य की सुपरस्टार, जबरदस्त काम।
- राकेश बेदी: एक बार फिर हैरान करने वाले।
- दानिश इकबाल: शानदार काम।
प्रत्येक किरदार को उचित स्थान मिला है, कोई भी अतिरिक्त नहीं लगता। एक्शन और वायलेंस का स्तर नेक्स्ट-लेवल पर है, कुछ सीन तो इतने इंटेंस हैं कि आप पलकें झपकाए बिना नहीं रह पाएंगे।
फिल्म का फर्स्ट हाफ पूरी तरह से आपको बांधे रखता है, लेकिन सेकंड हाफ की शुरुआत में थोड़ी सी पकड़ ढीली पड़ती है। राजनीतिक कटाक्ष और मौजूदा सरकार के फैसलों का बखान कहीं-कहीं थोड़ा जबरदस्ती का लगता है, जो पहले पार्ट में नहीं था। हालांकि, यह बहुत छोटी खामी है। VFX भी कहीं-कहीं कृत्रिम लगते हैं, लेकिन ये कमियां फिल्म के बड़े कैनवास पर बहुत छोटी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। फिल्म में कई सरप्राइज़ और ट्विस्ट हैं, खासकर क्लाइमैक्स, जो आपको पूरी तरह से चौंका देगा। यह एक ऐसा अनुभव है जिसे सिनेमा हॉल में ही देखना चाहिए। मनोरंजन जगत की चटपटी खबरों के लिए यहां क्लिक करें
निर्देशन और संगीत का जादू: आदित्य धर की असाधारण दृष्टि
आदित्य धर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह एक मास्टर स्टोरीटेलर हैं। उनकी लेखनी में एक अनोखी धार है, जो हर दृश्य को खास बनाती है। निर्देशन की तो जितनी तारीफ की जाए, कम है। उनकी बारीकी पर पकड़ इतनी जबरदस्त है कि आपको लगेगा आप पाकिस्तान की उन्हीं गलियों में मौजूद हैं। शाश्वत सचदेव का संगीत इस बार भी कहानी को गहराई देता है, पुराने गानों का उपयोग खूबसूरती से किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह फिल्म एक ऐसा सिनेमाई अनुभव है जो दर्शकों को लंबे समय तक याद रहेगा। इसे बार-बार देखने का मन करेगा।
रेटिंग: 4 स्टार्स




