
Railway Safety: जैसे खेतों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए बाड़ लगाई जाती है, ठीक वैसे ही अब भारतीय रेल अपनी पटरियों को सुरक्षित करने के लिए एक अभेद्य ‘कवच’ पहना रही है। पूर्व रेलवे के मालदा मंडल ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सुरक्षा और गति का एक नया अध्याय लिखना शुरू कर दिया है।
Railway Safety के लिए उठाया गया यह बड़ा कदम
मालदा मंडल के रेल प्रबंधक (DRM) मनीष कुमार गुप्ता के नेतृत्व में, रेलवे ने अपने क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करने और परिचालन क्षमता में सुधार के लिए एक व्यापक अभियान छेड़ा है। इसी अभियान के तहत, मंडल के प्रमुख रेल खंडों पर डब्ल्यू बीम मेटल सेफ्टी फेंसिंग लगाने का काम तेज गति से चल रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य चरणबद्ध तरीके से ट्रेनों की गति को 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचाना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह पहल भारतीय रेलवे के उस बड़े सपने का हिस्सा है, जिसमें पूरे देश में एक उच्च गति, उच्च क्षमता और सुरक्षित रेल नेटवर्क का निर्माण करना है। पूर्व रेलवे के व्यस्त मार्गों पर इस आधुनिक फेंसिंग प्रणाली के लागू होने से न केवल अतिक्रमण की घटनाओं में कमी आई है, बल्कि ट्रैक की सुरक्षा में भी काफी सुधार देखा गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कहाँ तक पहुंचा फेंसिंग का काम?
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत अब तक कुल 316.8 किलोमीटर रेलखंड के दोनों ओर फेंसिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष हिस्सों पर काम अभी भी प्रगति पर है। जिन प्रमुख खंडों पर यह काम हो रहा है, उनमें शामिल हैं:
- मालदा टाउन – न्यू फरक्का: 62.4 किमी
- महाराजपुर – विक्रमशिला: 72.4 किमी
- जमालपुर – किउल: 50 किमी
- विक्रमशिला – भागलपुर: 58 किमी
- भागलपुर – जमालपुर: 52 किमी
इस व्यापक फेंसिंग से अनधिकृत प्रवेश, पटरियों पर मवेशियों के आने से होने वाली दुर्घटनाओं और किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप में भारी कमी आने की उम्मीद है। इससे न केवल यात्री सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों का सुगम ट्रेन संचालन भी संभव हो सकेगा।
क्या है डब्ल्यू बीम मेटल फेंसिंग?
आपको बता दें कि डब्ल्यू बीम मेटल फेंसिंग क्रैश बैरियर तकनीक पर आधारित एक मजबूत और टिकाऊ सुरक्षा अवरोध है। यह रेलवे ट्रैक के किनारे एक दीवार की तरह काम करती है, जो किसी भी अनधिकृत प्रवेश को रोकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उच्च गति से चल रही ट्रेनों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाती है और विभिन्न मौसम परिस्थितियों में भी इसे बहुत कम रखरखाव की आवश्यकता होती है, जिससे ट्रेन संचालन पर कोई असर नहीं पड़ता। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



