
India Export: मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बावजूद, भारत ने क्षेत्र के देशों को खाद्य सामग्री की आपूर्ति जारी रखने का महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जो उसकी “पड़ोसी पहले” नीति और क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
मध्य-पूर्व तनाव के बीच जारी रहेगा India Export: भारत का बड़ा फैसला
गुरुवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने यह स्पष्ट किया कि मौजूदा संघर्षों से उत्पन्न बाधाओं के बावजूद, भारत खाड़ी देशों को आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बनाए रखेगा। हालांकि, इस आपूर्ति का पैमाना लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों और बढ़ती लागत पर निर्भर करेगा। सरकार कई मार्गों पर विचार कर रही है ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कोई बाधा न आए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। राजेश अग्रवाल ने कहा, “जहां भी संभव हो, हवाई कार्गो या लंबे मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। इन सभी विकल्पों की तलाश यह सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है कि भोजन समय पर पहुंचे, क्योंकि भोजन हमारी शीर्ष प्राथमिकता बना हुआ है।”
India Export की राह में चुनौतियाँ
ईरान में चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष और उससे जुड़े जोखिमों के कारण मालवाहक जहाजों का वॉर रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम 0.05 प्रतिशत से बढ़कर 0.75-1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इस वृद्धि ने ढुलाई लागत में भी लगभग 20-30 प्रतिशत का इजाफा किया है, जिससे समग्र आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है।
- पहले, लाल सागर या होर्मुज स्ट्रेट से सामान आसानी से पहुंचाए जाते थे, लेकिन मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति में जहाजों को अब केप ऑफ गुड होप (अफ्रीका के नीचे) से होकर जाना पड़ रहा है। इस लंबे मार्ग के कारण यात्रा में 15-20 दिन तक का अतिरिक्त समय लग रहा है।
- लंबी यात्रा से डीजल पर खर्च भी बढ़ा है, जो शिपमेंट की लागत में और इजाफा कर रहा है। इससे न केवल खाने-पीने की चीजों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है, बल्कि ऑर्डर्स में देरी और भुगतान में विलंब की आशंका भी बढ़ गई है।
- कई देशों द्वारा अपना एयरस्पेस बंद करने के कारण कार्गो क्षमता भी घट गई है और लागत में भी वृद्धि हुई है।
भारत से मध्य-पूर्व को निर्यात होने वाले प्रमुख उत्पाद
भारत और मिडिल-ईस्ट के बीच मजबूत और गहरे व्यापारिक संबंध रहे हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इन पर निर्भर है, वहीं खाड़ी देश अपनी खाद्य सुरक्षा के लिए काफी हद तक भारत पर निर्भर हैं।
- सऊदी अरब और ईरान जैसे मध्य-पूर्व के देश भारत से बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदार हैं।
- भारत खाड़ी देशों को आलू, प्याज, हरी सब्जियां, ताजे फल, इलायची, चाय और कॉफी, डेयरी प्रोडक्ट्स, और फ्रोजन फूड आइटम्स भी भेजता है।
- खाद्य पदार्थों के अलावा, दवाइयां, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स और ज्वेलरी भी भारतीय निर्यात सूची में शामिल हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका
यह स्थिति भारत के लिए एक चुनौती और एक अवसर दोनों प्रस्तुत करती है। एक तरफ उसे अपने व्यापारिक संबंधों को बनाए रखने के लिए उच्च लागत और लॉजिस्टिक्स बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह उसकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थिति को मजबूत करता है। संकट के इस समय में भारत का यह कदम न केवल व्यापारिक प्रतिबद्धता दर्शाता है, बल्कि मानवतावादी दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें। देशज टाइम्स बिहार का N0.1 इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।


