
Ram Katha: धर्म और नैतिकता का अद्भुत संगम
Ram Katha: जैसे सरयू की अविरल धारा अयोध्या को पवित्र करती है, वैसे ही श्री राम की कथा मानव मन को निर्मल कर देती है। बेनीपुर की धरती पर इन दिनों ज्ञान की ऐसी ही अमृत वर्षा हो रही है, जहां दूसरे दिन पूज्य श्री नंद जी महाराज ने श्री राम के जीवन के आदर्शों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राम का जीवन चरित्र संकटों को सहन करते हुए भी धर्म की रक्षा करने और मानवता को नैतिकता का मार्ग दिखाने वाली एक दिव्य गाथा है। श्री रामचरितमानस स्वार्थ से ऊपर उठकर सेवा, हिमालय के समान करुणा और समानता का पाठ पढ़ाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
प्रवचन के दौरान, श्री महाराज जी ने केवट, शबरी और वानर सेवा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने इन प्रसंगों के माध्यम से समझाया कि कैसे भगवान राम ने समाज के हर वर्ग को गले लगाकर सामाजिक समरसता की स्थापना की। उन्होंने सभी से इन आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया ताकि एक समरस समाज का निर्माण हो सके।
शिव परिवार से सीखें एकजुटता का पाठ
पारिवारिक और सामाजिक एकजुटता का महत्व समझाते हुए श्री महाराज जी ने भगवान शिव के परिवार का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “यदि पारिवारिक समरसता सीखनी हो तो भगवान शिव के परिवार से सीखनी चाहिए।” उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे शिव परिवार में मोर का शत्रु सर्प, नंदी का शत्रु सिंह और गणेश के वाहन मूषक का शत्रु सर्प, सभी आपसी द्वेष भुलाकर एक साथ रहते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि यदि परिवार में आपसी समझ और एकजुटता हो, तो समाज भी विकसित और शक्तिशाली बनता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/।
उन्होंने आगे कहा कि जब समाज एकजुट होता है, तो बड़ी से बड़ी विपत्ति का भी आसानी से सामना किया जा सकता है। इस अवसर पर कथा पंडाल में शिव विवाह की मनमोहक झांकी भी प्रस्तुत की गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह आयोजन क्षेत्र में भक्ति और ज्ञान का संचार कर रहा है।






