
Maa Chandraghanta Chalisa: चैत्र नवरात्रि के पवित्र तीसरे दिन, देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप माँ चंद्रघंटा की उपासना का विशेष विधान है। इस पावन अवसर पर माँ चंद्रघंटा चालीसा का पाठ करने से भक्तों के सभी भय दूर होते हैं और जीवन में शांति व समृद्धि का आगमन होता है। यह दिव्य चालीसा माँ की महिमा का गुणगान करती है और उनकी कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम है।
चैत्र नवरात्रि में माँ चंद्रघंटा चालीसा का पाठ: भय मुक्ति और शांति का मार्ग
माँ चंद्रघंटा चालीसा: महत्व और लाभ
नवरात्रि के तृतीय दिवस पर आदिशक्ति के ‘चंद्रघंटा’ स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। माँ के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिस कारण इन्हें चंद्रघंटा नाम से जाना जाता है। इनकी उपासना से अलौकिक शांति प्राप्त होती है और भक्तों के समस्त पाप तथा बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। माना जाता है कि माँ चंद्रघंटा का स्मरण मात्र से ही व्यक्ति निर्भय हो जाता है। इस दिन माता चंद्रघंटा की स्तुति का विशेष महत्व है। जो भक्त पूर्ण श्रद्धा और भक्तिभाव से माँ चंद्रघंटा चालीसा का पाठ करते हैं, उन पर देवी अपनी असीम कृपा बरसाती हैं, जिससे उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह पवित्र स्तुति भक्तों को भय मुक्त कर आंतरिक शक्ति प्रदान करती है। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें: धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
माँ चंद्रघंटा चालीसा पाठ की विधि
- चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- माता को सफेद पुष्प, अक्षत, रोली, कुमकुम, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- माँ चंद्रघंटा का ध्यान करते हुए चालीसा का पाठ प्रारंभ करें।
- पाठ पूर्ण होने पर आरती करें और माँ से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना करें।
- शांत मन से माँ के स्वरूप का ध्यान करें और उनकी कृपा का अनुभव करें।
माँ चंद्रघंटा चालीसा
जय जय जय माँ चंद्रघंटा। दुःख दरिद्र हर सुखदाता।।
चंड मुंड संहारिणी देवी। भय भंजन मंगल करणी।।
सृष्टि सकल में नाम तुम्हारा। चंद्रघंटा शुभ नाम तुम्हारा।।
सूर्य समान तेज है तेरा। तीनों लोक में नाम है तेरा।।
सिंह वाहिनी शैल कुमारी। नव दुर्गा में तीसरी नारी।।
घंटा ध्वनि प्रलय मचावे। दानव दैत्य सभी डर जावे।।
तेरी महिमा अपरंपार। भक्तों का करती उद्धार।।
जो जन तेरा ध्यान लगावे। मनवांछित फल शीघ्र पावे।।
कष्ट निवारण दुःख हरणी। शरण गहे की रक्षा करणी।।
अणिमा लघिमा सिद्धदात्री। कामधेनु वरदायक यात्री।।
शत्रु नाशक भय नाशक। भव सागर से तारक तू ही।।
ज्ञान योगिनी ध्यान गम्या। भक्त वत्सल सर्व सुगम्या।।
सत्य स्वरूपिणी तेजोमयी। अज्ञान तिमिर हर सुखमयी।।
काल रात्रि की शक्ति रूपा। चंद्रघंटा तुम दिव्य रूपा।।
महाकाली महालक्ष्मी। महासरस्वती शुभ धामी।।
ब्रह्मा विष्णु शिव की शक्ति। तुम हो माता जग की भक्ति।।
संकट मोचन दुखियारी। पतित पावन भव भय हारी।।
जो जन तेरा पाठ पढ़ावे। संकट से मुक्ति शीघ्र पावे।।
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। मनवांछित फल शीघ्र पावे।।
रोग दोष सब दूर भगावे। सुख समृद्धि घर में आवे।।
नित्य नेम से पाठ जो करता। सब दुःख उसके हरता।।
जय जय जय माँ चंद्रघंटा। जय जय जय माँ चंद्रघंटा।।
जो चालीसा यह पढ़े सुनावे। सब विधि सुख और मोक्ष पावे।।
माँ चंद्रघंटा की यह पवित्र चालीसा सभी प्रकार के संकटों और बाधाओं को दूर करने में सहायक है। इसके नियमित पाठ से मन शांत होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह चालीसा पाठ आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा, जिससे आप निर्भीक होकर अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर हो सकेंगे। नवरात्रि के इन पावन दिनों में माँ चंद्रघंटा की श्रद्धापूर्वक उपासना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें। उपद्रवी शक्तियों का नाश करने वाली माँ चंद्रघंटा अपने भक्तों को अभय प्रदान करती हैं और उन्हें सभी प्रकार की विपत्तियों से बचाती हैं।


