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मार्च, 21, 2026
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Gold Price: सोने की कीमत में भारी गिरावट: जानें क्यों और आगे क्या?

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सोने की कीमत में भारी गिरावट: जानें क्यों और आगे क्या?

Gold Price: अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक बाजारों में महंगाई का डर बढ़ गया है, जिसका सीधा असर पिछले सप्ताह सोने की कीमतों पर देखने को मिला। भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद सोने में गिरावट जारी रही, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव की शुरुआत में सोना 1,60,000 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था। हालांकि, पिछले हफ्ते MCX पर सोने को बड़ा झटका लगा, और यह 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय COMEX बाजार में भी सोने का भाव 4,574.90 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर आकर रुका। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, सोना इस समय एक जटिल मैक्रो माहौल से गुजर रहा है, जहां भू-राजनीतिक तनाव और मौद्रिक सख्ती की उम्मीदें विपरीत दिशाओं में खींच रही हैं, जिससे इसमें और गिरावट की आशंका है। भारत में सोने का भाव 1,27,000 प्रति 10 ग्राम और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,250 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

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Gold Price में गिरावट की मुख्य वजहें

सोने की कीमतों में मौजूदा गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिन्हें समझना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है:

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  • SS WealthStreet की फाउंडर सुगंधा सचदेवा ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता टकराव—विशेषकर ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायली हमला और प्रमुख खाड़ी देशों में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईरान के जवाबी हमले—ने वैश्विक ऊर्जा जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आया है, जिससे दुनिया भर में ईंधन और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के कारण आयातित महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं।
  • सुगंधा सचदेवा आगे कहती हैं कि मजबूत अमेरिकी डॉलर, ऊंची बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा लगातार महंगाई की चिंताएं और अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में बड़ी कटौती की कम होती उम्मीदों के बीच सोने की कीमतें नजदीकी भविष्य में दबाव में रह सकती हैं।
  • यदि अमेरिका में महंगाई कम नहीं होती है, तो इसे काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा देगा ताकि लोग खर्च कम करें। ऊंची ब्याज दरों से डॉलर मजबूत होता है, डॉलर की वैल्यू बढ़ जाएगी क्योंकि दुनियाभर के निवेशक डॉलर में अपना पैसा लगाने लगेंगे। चूंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सोने का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर मजबूत होने से सोना सस्ता हो जाएगा।
  • SEBI-रजिस्टर्ड मार्केट एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध जारी होने के बावजूद सोने के रेट स्थिर या नीचे हैं। इसकी वजह यह है कि मार्केट को लग रहा है कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के सामने महंगाई की चुनौती आ सकती है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने की उम्मीद है और ऐसे में सेंट्रल बैंकों के पास ब्याज दरें बढ़ाने या उन्हें स्थिर रखने के अलावा कोई और चारा नहीं होगा। यह पिछले हफ्ते साफ दिखा जब US फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान, बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड ने ब्याज दरों को लेकर सतर्क या सख्त रवैया अपनाने के संकेत दिए।
  • आमतौर पर, जब सोने की कीमतें 1.50 लाख के पार पहुंच जाती हैं, तो निवेशक अपना मुनाफा निकालने के लिए भारी मात्रा में सोना बेचने लगते हैं, जिससे बाजार में अचानक से सोने की आपूर्ति काफी बढ़ जाती है। ऐसे में भाव नीचे आने लगते हैं।
  • दुनिया में चीन और भारत सोने के सबसे बड़े खरीदार हैं। कीमतें ऊंची रहेंगी, तो मांग में कमी आएगी। ऐसे में कीमतों पर सीधा असर पड़ेगा।
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सोने की कीमतों का भविष्य और आगे की राह

बाजार पर मंदी का दबाव जारी रहने की उम्मीद जताते हुए LKP सिक्योरिटीज में रिसर्च (कमोडिटी और करेंसी) के VP जतिन त्रिवेदी ने कहा, “बाजार का माहौल अभी भी कमजोर बना हुआ है क्योंकि मुख्य मैक्रो संकेत अभी भी अनुकूल नहीं हैं।” उन्होंने आगे बताया कि उम्मीद है कि ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी, जबकि चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं, जिससे महंगाई की चिंताएं बनी हुई हैं और सोने की कीमतों में बढ़त सीमित हो रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कुल मिलाकर, सोने में उतार-चढ़ाव बना रहने के साथ-साथ इसके कमजोर रहने की संभावना है। निकट भविष्य में इसकी ट्रेडिंग रेंज 1,40,000 से 1,47,000 के बीच रहने का अनुमान है।

SS WealthStreet की सुगंधा सचदेवा ने कहा कि MCX पर सोने की कीमत 1,70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पास मजबूत रेसिस्टेंस का सामना कर रही है, जबकि 1,65,000 एक अहम नजदीकी-अवधि का आधार (pivot) बना हुआ है। जब तक कीमतें इन स्तरों से नीचे रहेंगी, तब तक रुझान में सुधार (corrective) बने रहने की संभावना है और कीमतें गिरकर 1,35,000 और 1,27,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं। रियल-टाइम बिजनेस – टेक्नोलॉजी खबरों के लिए यहां क्लिक करें

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