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मार्च, 22, 2026
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चैत्र नवरात्रि 2026: मां कूष्मांडा की पूजा से पाएं रोग-दुख से मुक्ति और समृद्धि

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के चौथे दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की आराधना का विशेष विधान है। ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी मां कूष्मांडा अपनी मंद मुस्कान से ही सृष्टि का सर्जन करती हैं, इसलिए इन्हें कूष्मांडा कहा गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मान्यता है कि माता की विधि-पूर्वक पूजा करने से रोग और दुखों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां कूष्मांडा की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष ध्यान और उपासना आवश्यक है।

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चैत्र नवरात्रि 2026: मां कूष्मांडा की आराधना और महत्व

चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन अत्यंत पावन होता है, जब भक्तगण मां कूष्मांडा की भक्ति में लीन होते हैं। यह देवी अपने भक्तों को आरोग्य, धन और ऐश्वर्य प्रदान करती हैं। इनकी पूजा से सभी प्रकार के भौतिक और आध्यात्मिक कष्ट दूर होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शास्त्रों में वर्णित है कि मां कूष्मांडा का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है, जिससे वे पूरे ब्रह्मांड को अपनी ऊर्जा से प्रकाशित करती हैं।

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चैत्र नवरात्रि पर मां कूष्मांडा की पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान पर मां कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • माता को लाल चुनरी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
  • धूप, दीप प्रज्वलित कर माता की आरती करें।
  • मां कूष्मांडा को मालपुआ, हरी इलायची और सफेद पेठा अत्यंत प्रिय है, इन्हें भोग में अर्पित करें।
  • हरी चूड़ियां और हरे वस्त्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  • पूजा के दौरान ‘ॐ ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः’ मंत्र का जाप करें। यह मंत्र विशेष फलदायी माना गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
  • माता को कुमकुम, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं।
  • अंत में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना भी कल्याणकारी होता है।
यह भी पढ़ें:  चैत्र नवरात्रि 2026: मां कूष्मांडा की कृपा और व्रत कथा का महत्व

मां कूष्मांडा पूजा का शुभ मुहूर्त

तारीखतिथिशुभ मुहूर्त
24 मार्च 2026चैत्र शुक्ल चतुर्थीसुबह 06:15 बजे से 07:45 बजे तक (अभिजीत मुहूर्त)

मां कूष्मांडा का दिव्य स्वरूप और महत्व

देवी कूष्मांडा अष्टभुजाधारी हैं, इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत-कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इनकी सवारी सिंह है। अपनी मंद मुस्कान से सृष्टि की रचना करने वाली यह देवी भक्तों के जीवन में खुशहाली लाती हैं। इनकी उपासना से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। जो भक्त सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं, उन्हें संसार के सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। मां कूष्मांडा का यह मूल मंत्र विशेष रूप से प्रभावी माना गया है।

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

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निष्कर्ष और उपाय

चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की भक्तिपूर्वक पूजा करने से न केवल रोग और शोक दूर होते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना और मां को हरे फल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-शांति के लिए इस पावन दिन मां कूष्मांडा की अर्चना अवश्य करें।

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