
Bihar weather: मौसम का रौद्र रूप किसानों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं, जहाँ उम्मीदों की हरी-भरी फसलें अब पानी और ओलों की मार से खेतों में बिछी पड़ी हैं। पिछले दो दिनों से मौसम की बेरुखी ने बेनीपुर अनुमंडल के किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी पर पानी फेर दिया है, और अब मौसम विज्ञान विभाग से मिल रही नई चेतावनी उनके सीने पर सांप लोटने जैसा काम कर रही है।
Bihar Weather: तेज आंधी और ओलावृष्टि ने मचाई तबाही
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार देर शाम से शुरू हुई तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने रबी की फसलों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया है। गेहूं और मक्के की फसलें तो खेतों में इस कदर बिछ गई हैं जैसे किसी ने उन्हें रौंद दिया हो। ऊपर से तेज बारिश और ओलों ने खेतों में पानी जमा कर दिया है, जिससे बची-खुची उम्मीदें भी धूमिल हो रही हैं और किसानों के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं। महिनाम गांव के किसान बजरंगी झा और प्रदीप झा से लेकर पोहद्दी के रामकुमार झा और डखराम के कामेश्वर मिश्र तक, सभी की कहानी एक जैसी है।
किसानों ने बताया कि तिलहन की फसल तो लगभग कटकर घर आ चुकी थी, लेकिन दलहन में मसूर, मटर के साथ-साथ गेहूं और मक्के की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। किसानों का कहना है कि वे पहले से ही बाढ़ और सुखाड़ की मार झेलकर आर्थिक रूप से टूट चुके थे, लेकिन किसी तरह कर्ज लेकर दोबारा खेती में जुटे थे। इस साल की बेमौसम बारिश ने उनकी रही-सही कमर भी तोड़ दी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
सरकार से मुआवजे की गुहार, प्रशासन ने दिए आकलन के निर्देश
किसानों की चिंता यहीं खत्म नहीं हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा जारी की गई नई चेतावनी के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कारण एक बार फिर तेज बारिश और आंधी-तूफान की आशंका है। इस खबर ने किसानों को और भी भयभीत कर दिया है। अब उनकी एकमात्र उम्मीद सरकार पर टिकी है और वे लगातार फसल मुआवजे की मांग कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। किसानों की पीड़ा है कि अगर सरकार ने अविलंब सुधि नहीं ली तो उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ जाएगी।
इस संबंध में जब प्रखंड कृषि पदाधिकारी सूरज राम से बात की गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि बेमौसम बारिश और आंधी ने रबी फसल को व्यापक क्षति पहुंचाई है। उन्होंने बताया कि इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। सभी किसान सलाहकारों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में खेतों का दौरा कर फसल क्षति का आकलन करें और जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट जमा करें, ताकि किसानों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।





