
Bihar Pollution: बिहार की हवा में घुलते ज़हर और दम घोंटते कचरे के बीच, सरकार ने जागरूकता का एक ऐसा ‘वेंटिलेटर’ लगाया है, जो शायद सूबे की सेहत सुधार दे। पटना के गांधी मैदान में बिहार दिवस के भव्य आयोजन के दौरान, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और जानकारीपूर्ण स्टॉल लगाया है, जिसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत करना है।
Bihar Pollution को नियंत्रित करने के लिए पर्षद की अनूठी पहल
बिहार दिवस के उत्सव के मौके पर 22 मार्च को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार के पंडाल में प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा यह विशेष जागरूकता स्टॉल स्थापित किया गया है। इस स्टॉल का लक्ष्य जन-सामान्य तक पहुंचकर उन्हें पर्यावरण की गंभीर होती स्थिति से अवगत कराना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां आने वाले लोगों को विभिन्न पर्यावरणीय विषयों पर जानकारी देने के लिए रंगीन फोल्डर वितरित किए जा रहे हैं।
पर्षद् ने कुल आठ महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी मुद्रित कराई है, जिन्हें लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। इनमें शामिल हैं:
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
- निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन
- वाहन प्रदूषण के खतरे
- ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमावली, 2000
- जीव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन
- ई-अपशिष्ट (E-waste) प्रबंधन
- प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन
इन सभी प्रकाशनों को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराने के लिए विशेष QR कोड भी बनाए गए हैं, जिन्हें कोई भी अपने मोबाइल से स्कैन कर आसानी से डाउनलोड कर पढ़ सकता है। पर्षद का मानना है कि जन-भागीदारी के बिना पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य अधूरा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
प्रदूषण मापने वाले यंत्र बने आकर्षण का केंद्र
पर्षद् के इस स्टॉल पर केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक जानकारी भी दी जा रही है। यहां वातावरण में मौजूद धूलकण, विशेष रूप से PM10 और PM2.5, के नमूने एकत्र करने वाले यंत्रों को प्रदर्शित किया गया है। यह यंत्र लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके साथ ही, ध्वनि स्तर मापक यंत्र का भी सीधा संचालन कर दर्शकों को दिखाया जा रहा है कि हमारे आसपास ध्वनि का स्तर कितना अधिक और खतरनाक हो सकता है।
स्टॉल पर मौजूद पर्षद् के वैज्ञानिक कर्मी इन यंत्रों के संचालन और उनके महत्व के बारे में दर्शकों की हर जिज्ञासा का समाधान कर रहे हैं। लोगों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न विषयों पर आकर्षक और रंगीन स्टैंडी भी लगाए गए हैं, जिनमें ठोस अपशिष्ट, जल प्रदूषण, मिशन लाइफ और ‘नो हॉर्न डे’ जैसे अभियान प्रमुख हैं। इस अवसर पर राज्य पर्षद् ने अपनी अपील को एक बार फिर दोहराया कि सभी नागरिक हर रविवार को ‘नो हॉर्न डे’ मनाएं और सप्ताह के बाकी दिनों में भी बेवजह हॉर्न बजाने से बचें ताकि ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।





