
वैश्विक खबर: Middle East conflict: युद्ध की लपटें जब कहीं उठती हैं, तो उसकी तपिश दूर-दूर तक महसूस होती है। पश्चिम एशिया में सुलग रही आग ने अब दुनिया की धमनियों, यानी आपूर्ति श्रृंखला को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई गंभीर बाधाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस जटिल समस्या के राजनयिक समाधान की पुरजोर मांग की है। मीडिया से मुखातिब होते हुए कांग्रेस सांसद ने ऊर्जा खपत करने वाले देशों के समक्ष उत्पन्न हो रही कठिनाइयों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, खाद्य पदार्थ और जीवन रक्षक दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला पर इस संघर्ष के नकारात्मक प्रभावों का विस्तार से उल्लेख किया।
Middle East conflict: आपूर्ति श्रृंखला पर मंडराया खतरा और बढ़ता तनाव
तिवारी ने चेतावनी दी कि यह संघर्ष संभवतः अपने सबसे खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है। ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में इस समय 3000 से अधिक जहाज निष्क्रिय पड़े हैं। उन्होंने सभी पक्षों से तनाव कम करने और कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने का आह्वान किया। ऊर्जा का उपभोग करने वाले देशों के लिए स्थिति हर बीतते पल के साथ और अधिक गंभीर होती जा रही है, क्योंकि यह केवल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का मामला नहीं है। उर्वरक, खाद्य पदार्थ और आवश्यक दवाएं भी इस बाधा से अछूती नहीं हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह से बाधित हो चुकी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले तीन सप्ताह से जारी शत्रुता के बाद हम इस संघर्ष के एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर आ चुके हैं। इससे वैश्विक व्यापार पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
रविवार को, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न स्थिति के संदर्भ में जारी और प्रस्तावित शमन उपायों पर चर्चा करने के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा संघर्ष के संबंध में अब तक उठाए गए तथा भविष्य के लिए नियोजित उपायों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।
बैठक में कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), निर्यातकों, जहाजरानी, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों पर अपेक्षित प्रभावों तथा उनसे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर गहन चर्चा हुई। देश के समग्र व्यापक आर्थिक परिदृश्य और आगे उठाए जाने वाले उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/ आम आदमी की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं, जिनमें खाद्य, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा शामिल हैं, की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर भी गंभीर विचार किया गया ताकि इस संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर सिर्फ कुछ देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव वैश्विक व्यापार और आम नागरिक की दैनिक ज़रूरतों पर भी पड़ता है। सरकार इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्रिय रूप से रणनीति बना रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
भारत की तैयारी और भविष्य की चुनौतियाँ
भारत सरकार पश्चिम एशिया में जारी इस गंभीर स्थिति के संभावित प्रभावों को लेकर बेहद सतर्क है। आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी बड़ी बाधा से देश की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए, न केवल अल्पकालिक बल्कि मध्यम और दीर्घकालिक रणनीतियों पर भी विचार किया जा रहा है ताकि खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक इस बात का संकेत है कि भारत इस वैश्विक चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और कूटनीतिक तथा आर्थिक दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभाने को प्रतिबद्ध है।



