
H.C. Verma: जैसे जौहरी ही हीरे की असल कीमत पहचानता है, वैसे ही ज्ञान के मंदिर में एक महान विद्वान ने सदियों पुराने खजाने को देखकर उसे अनमोल बता दिया। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारत के महान भौतिकशास्त्री और पद्म श्री से सम्मानित प्रो. एच. सी. वर्मा की, जिन्होंने दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के महाराजा कामेश्वर सिंह सामाजिक विज्ञान शोध संस्थान के राज पुस्तकालय का भ्रमण किया। उन्होंने यहां की किताबों के संग्रह को अद्भुत और दुर्लभ पुस्तकों का संग्रहालय करार दिया।
जब H.C. Verma ने देखे सदियों पुराने ग्रंथ
भ्रमण के दौरान प्रो. एच. सी. वर्मा ने पुस्तकालय में संग्रहीत ज्ञान के महासागर में गहरी डुबकी लगाई। उन्होंने यहां एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल के जनरलों, मैक्स मूलर द्वारा अनुदित धार्मिक ग्रंथों और जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन के भाषाई सर्वेक्षण जैसे अमूल्य दस्तावेजों को बड़ी गहनता से देखा। इसके अलावा उन्होंने पुस्तकालय में मौजूद दुर्लभ पेंटिंग्स और चंदा झा द्वारा रचित मिथिला भाषा रामायण की पांडुलिपि को भी निहारा। इन ऐतिहासिक ग्रंथों को देखकर वह काफी प्रभावित हुए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि यह पुस्तकालय वास्तव में ज्ञान का एक अनमोल खजाना है, जिसे सहेज कर रखा गया है।
प्रो. वर्मा ने इस बात पर भी जिज्ञासा व्यक्त की कि यहां कितने शोधार्थी शोध कार्य के लिए आते हैं। उन्होंने इस संग्रह को शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान बताते हुए कहा कि यह किसी भी शोधार्थी के लिए सोने की खान से कम नहीं है। उन्होंने पुस्तकालय के रख-रखाव पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी पुरानी दुर्लभ पुस्तकें आज भी सुरक्षित हैं, यह प्रशंसनीय है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
शोध के लिए बताया महत्वपूर्ण, डिजिटलीकरण पर दिया जोर
महान भौतिकशास्त्री ने पुस्तकालय में मौजूद संग्रह के बेहतर संरक्षण और इसे दुनिया भर के शोधार्थियों तक पहुंचाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि इन दुर्लभ पुस्तकों की सुरक्षा के लिए इनका डिजिटल रूप में संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। प्रो. वर्मा ने जोर देकर कहा कि डिजिटलीकरण होने से न केवल ये ग्रंथ हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर शोधकर्ता और ज्ञान के जिज्ञासु भी इसका लाभ उठा सकेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इससे पहले, पुस्तकालय पहुंचने पर निदेशक प्रो. दमन कुमार झा ने प्रो. वर्मा का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस विशेष अवसर पर उनके साथ विश्वविद्यालय के कई अन्य महत्वपूर्ण पदाधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें निदेशक प्रो. अजय नाथ झा, भौतिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. नौशाद आलम, डॉ. अमृत कुमार झा और डॉ. संतोष कुमार झा समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल थे। यह भ्रमण अकादमिक जगत के लिए एक यादगार पल बन गया।

