
Darbhanga News: जंगल की सांसों की रखवाली करने वाले अब अपनी ही सांसों के लिए सड़क पर संघर्ष की स्याही से इबारत लिख रहे हैं। दरभंगा में वन विभाग के दैनिक सुरक्षा श्रमिकों ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन महाधरना शुरू कर दिया है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
Darbhanga News: क्या हैं प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों की मुख्य मांगें?
लहेरियासराय स्थित वन प्रमंडल पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष सोमवार से शुरू हुआ यह अनिश्चितकालीन महाधरना वन सुरक्षा श्रमिकों के वर्षों से दबे गुस्से का परिणाम है। श्रमिकों का आरोप है कि विभाग में भ्रष्टाचार, मनमानी और शोषण का माहौल है, जिसके खिलाफ अब वे आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा है, जो उनके अधिकारों और सम्मान से जुड़ी हैं।
श्रमिकों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- विभाग में कार्यरत सभी वन सुरक्षा श्रमिकों को तत्काल परिचय पत्र जारी किया जाए।
- सभी वेतनभोगी श्रमिकों का बकाया वेतन भुगतान किया जाए और भविष्य में भुगतान मास्टर रोल के माध्यम से सुनिश्चित हो।
- लंबे समय से कार्यरत कुशल श्रमिकों को ‘कुशल श्रमिक’ का दर्जा देकर सरकारी मापदंडों के अनुसार उनका वर्ग निर्धारित किया जाए।
- प्रत्येक महीने की 5 तारीख तक वेतन का भुगतान हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
- माननीय न्यायालय के आदेश के अनुसार, वन विभाग द्वारा प्रेषित श्रमिकों की सूची को सार्वजनिक कर उसकी एक प्रतिलिपि संघ को उपलब्ध कराई जाए।
- वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के लिए सभी वन क्षेत्रों में श्रमिकों के पद पर आवंटित राशि और भुगतान पंजी का पूरा ब्योरा उपलब्ध कराया जाए।
इन मांगों के पूरा होने तक श्रमिक अपना आंदोलन जारी रखने पर अडिग हैं। उनका कहना है कि जब तक वन विभाग उनकी सुध नहीं लेता, वे धरना स्थल से नहीं हटेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/
धरना प्रदर्शन में ये रहे मौजूद
इस महाधरना प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी एकजुट हुए हैं। मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष आर. के. दत्ता के नेतृत्व में कई प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इनमें अध्यक्ष कमल देव प्रसाद सिंह, ललन कुमार, साबूरी दास, कौशल झा, रघुपति पासवान, महादेव पासवान, कोषाध्यक्ष सरोजानंद झा, मणिकांत मंडल, रामबाबू सिंह, श्याम यादव, रूपेश कुमार, शालू देवी, पवन कुमार झा, भोला पासवान, रामसागर मुखिया, मुकेश कुमार पासवान, मलहु पासवान और दुखी कामत सहित दर्जनों अन्य कर्मचारी शामिल थे, जिन्होंने अपनी आवाज बुलंद की।

