
India’s Foreign Policy: वैश्विक शतरंज पर हर चाल, हर मोहरा भारत के भविष्य की दिशा तय करता है। लेकिन जब इन चालों पर किसी बाहरी शक्ति की छाया पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है।
India’s Foreign Policy: क्या अमेरिका के इशारों पर नाच रही है भारत की विदेश नीति? राहुल गांधी के बयान से गरमाई सियासत
India’s Foreign Policy पर राहुल गांधी के गंभीर आरोप
भारत की विदेश नीति एक बार फिर राजनीतिक बहसों के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के हालिया बयान ने देश के राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है। राहुल गांधी ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि भारत की विदेश नीति अमेरिकी प्रभाव में काम कर रही है, और कई महत्वपूर्ण निर्णय पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में लिए गए थे। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन के दबाव में भारत ने अपनी स्वतंत्र नीति को ताक पर रख दिया।
राहुल गांधी के इन आरोपों ने सरकार पर पलटवार करने का मौका दिया है, वहीं विपक्ष को विदेश नीति के मुद्दे पर सरकार को घेरने का नया हथियार मिल गया है। यह पहली बार नहीं है जब भारत की विदेश नीति पर आंतरिक राजनीति में सवाल उठे हैं, लेकिन अमेरिकी प्रभाव में फैसले लेने का आरोप इसे एक नया आयाम देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन आरोपों से देश की कूटनीतिक स्वायत्तता को लेकर भी बहस छिड़ गई है।
अमेरिका का कथित हस्तक्षेप और भारत की कूटनीति
राहुल गांधी ने अपने बयान में संकेत दिया कि भारत के रणनीतिक हितों की अनदेखी की गई और अमेरिका की विदेश नीति के अनुरूप कदम उठाए गए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का दावा करता रहा है, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में। उन्होंने यह भी कहा कि इस कथित अमेरिकी दबाव के कारण भारत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से नहीं रख पाया।
कांग्रेस नेता ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए कुछ घटनाओं का भी जिक्र किया, हालांकि उनका विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को अपनी विदेश नीति का निर्धारण अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर करना चाहिए, न कि किसी महाशक्ति के प्रभाव में।
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विदेश मंत्रालय की सफाई और राजनीतिक पलटवार
इन गंभीर आरोपों के बाद विदेश मंत्रालय और सत्तारूढ़ दल की ओर से स्वाभाविक रूप से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें ‘गैर-जिम्मेदाराना’ और ‘देश की छवि खराब करने वाला’ करार दिया है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा से स्वतंत्र रही है और यह राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही संचालित होती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने पलटवार करते हुए कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान की विदेश नीति पर सवाल उठाए हैं, जिसमें कुछ फैसलों को लेकर उनकी आलोचना की गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये आरोप आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बन सकते हैं, जहां राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे मुद्दे जनता के बीच चर्चा का विषय रहते हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह बहस भारत की कूटनीति की दिशा और दशा दोनों पर गहरा असर डाल सकती है।
कूटनीति की स्वतंत्रता पर बहस
राहुल गांधी के बयान ने एक बार फिर भारत की कूटनीतिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर बहस छेड़ दी है। यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के साथ भारत अपनी पहचान को बनाए रख पाएगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में अपनी भूमिका निभानी होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या सरकार इन आरोपों का ठोस जवाब दे पाती है या नहीं। भारतीय राजनीति में विदेश नीति का मुद्दा हमेशा से ही संवेदनशील रहा है, और इस पर की गई कोई भी टिप्पणी गहन जांच का विषय बन जाती है।





