
श्रीराम जन्मोत्सव: अहल्यास्थान में धूम-धाम से मनेगा प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव, गूंजेंगे जयकारे
कमतौल के पवित्र तीर्थ स्थल अहल्यास्थान में बैगन का भार चढ़ाने की सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने देवी अहल्या की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और शारीरिक कष्टों से मुक्ति की कामना की।
त्रेता युग की कथाओं में देवी अहल्या का उद्धार प्रभु श्रीराम के चरण रज से हुआ था, जिसके बाद से यह स्थान अत्यंत पावन माना जाता है। कलियुग में भी इस तीर्थ स्थल की महत्ता कम नहीं हुई है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां आकर बैगन का भार चढ़ाते हैं। रामनवमी के अवसर पर यह भीड़ सैकड़ों-हजारों में तब्दील हो जाती है। बुधवार को भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने अहल्यास्थान पहुंचकर देवी अहल्या का पूजन किया और मन्नतें मांगीं। विशेषकर शरीर पर उग आए मस्सों से मुक्ति के लिए अहल्या गहबर में बैगन का भार चढ़ाया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
देवी अहल्या की कथा और महत्व
अहल्या गहबर की मुख्य पुजारिन अवंतिका मिश्रा ‘किशोरी जी’ ने बताया कि बैगन का भार चढ़ाने की परंपरा कब से शुरू हुई, इसका कोई लिखित प्रमाण तो नहीं है, लेकिन यह सदियों पुरानी मान्यता है। ऐसी मान्यता है कि देवी अहल्या को बैगन का भार समर्पित करने से श्रद्धालुओं के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस पावन स्थली पर न केवल आसपास के गांवों से बल्कि दूर-दराज से भी श्रद्धालु अपने बच्चों का मुंडन और अन्य महत्वपूर्ण संस्कार करवाने आते हैं। रामनवमी के पर्व पर ऐसे संस्कारों की संख्या एक दर्जन से अधिक होती है।
बैगन का भार: एक अनोखी परंपरा
यह परंपरा श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। बैगन का भार चढ़ाने के पीछे यह मान्यता है कि इससे शारीरिक कष्टों, विशेषकर मस्सों से मुक्ति मिलती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह अनूठी परंपरा श्रद्धालुओं को देवी अहल्या के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है।
मेले का ऐतिहासिक महत्व और व्यवस्था
पुजारी कामेश्वर मिश्रा ने बताया कि यहां लगने वाले मेले का इतिहास भी अत्यंत प्राचीन है। पंद्रह दिनों तक चलने वाले इस मेले में विभिन्न प्रकार की खाने-पीने की चीजों के अलावा घरेलू उपयोग और कृषि संबंधी लकड़ी व लोहे के औजार भी मिलते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा पीने के पानी के टैंकर, ठहरने के लिए टेंट व पंडाल की व्यवस्था की जाती है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल की तैनाती की जाती है, साथ ही कंट्रोल रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों और संवेदनशील स्थानों पर ड्रोन कैमरे से भी मेले की निगरानी की जाती है।
बजरंगबली का ध्वजारोहण और उल्लास
कमतौल श्रीराम जन्मोत्सव का पर्व शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। अहल्यास्थान, गौतम आश्रम और अन्य कई मंदिरों तथा घरों में प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कई जगहों पर बजरंगबली का ध्वजारोहण भी किया जाएगा।
अहल्या गौतम धार्मिक न्यास समिति के अध्यक्ष बालेश्वर ठाकुर ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अहल्यास्थान स्थित रामजानकी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में शुक्रवार को दोपहर बारह बजे श्रीराम जन्मोत्सव का कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित होगा। इस पावन अवसर पर जय श्रीराम के जयकारों से पूरा अहल्यास्थान परिसर गूंज उठेगा। भगवान की दिव्य आरती के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
आपको बता दें कि एक अप्रैल, बुधवार को प्रभु श्रीराम का छठिहार उत्सव भी मनाया जाएगा, जिसके उपलक्ष्य में भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया जाएगा। इस प्रकार के धार्मिक आयोजन स्थानीय लोगों के बीच समन्वय और उत्साह बढ़ाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अहल्यास्थान में श्रीराम जन्मोत्सव का दिखेगा सौंदर्य
श्रीराम के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। मंदिरों को सजाया गया है और विशेष पूजा-अर्चना की तैयारियां की गई हैं। यह धार्मिक उत्सव न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। इस बार श्रीराम जन्मोत्सव के अवसर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि सभी भक्त बिना किसी बाधा के प्रभु के दर्शन कर सकें।
धार्मिक न्यास समिति द्वारा सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया जा रहा है। सुरक्षा और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्वक पर्व मना सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस उत्सव के संबंध में अधिक जानकारी के लिए और देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
विविध धार्मिक आयोजन
प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव के साथ-साथ, बजरंगबली के ध्वजारोहण जैसे अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जो क्षेत्र की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं। इन आयोजनों से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को बल मिलता है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





