
Digital Arrest: ED अफसर बन कर रहे थे ठगी, दरभंगा से दबोचा गया मास्टरमाइंड, झारखंड CID की बड़ी कार्रवाई
Digital Arrest: साइबर ठगों के मकड़जाल ने एक और जिंदगी को उलझा लिया, लेकिन कानून के लंबे हाथ कॉलर तक पहुंच ही गए। झारखंड CID ने डिजिटल अरेस्ट के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए बिहार के दरभंगा से एक शातिर को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अफसर बताकर लोगों को डराता और उनसे मोटी रकम वसूलता था।
झारखंड सीआईडी की साइबर क्राइम ब्रांच टीम को यह बड़ी सफलता हाथ लगी है। गिरफ्तार किया गया साइबर अपराधी सूरज कुमार चौधरी बिहार के दरभंगा का रहने वाला है। उस पर आरोप है कि उसने अपने गिरोह के साथ मिलकर झारखंड के एक व्यक्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर उससे ₹10 लाख से ज्यादा की ठगी की थी।
क्या है Digital Arrest और कैसे हुआ इसका खुलासा?
यह मामला तब सामने आया जब झारखंड के एक पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के अनुसार, उसे एक फोन कॉल आया जिसमें फोन करने वाले ने खुद को ईडी का बड़ा अधिकारी बताया। ठगों ने पीड़ित को डराया कि उसके नाम पर एक अवैध पार्सल मिला है और उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके बाद उसे वीडियो कॉल पर लेकर घंटों तक बंधक बनाए रखा और किसी से बात नहीं करने दी, इसी प्रक्रिया को डिजिटल अरेस्ट कहते हैं।
डर के मारे पीड़ित ने ठगों के बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ₹10,00,047 ट्रांसफर कर दिए। जब उसे अपने साथ हुए इस साइबर अपराध का अहसास हुआ, तो उसने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। वादी के लिखित आवेदन के आधार पर, साइबर थाना में 25 फरवरी 2024 को आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत कांड दर्ज किया गया था।
दरभंगा से जुड़े ठगी के तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीआईडी ने एक विशेष टीम का गठन किया और तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान ठगी में इस्तेमाल हुए बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के तार बिहार के दरभंगा से जुड़े। सीआईडी की टीम ने पूरी योजना के साथ दरभंगा में छापेमारी की और इस कांड में शामिल पॉइंट ऑफ सेल एजेंट (सिम विक्रेता) सूरज कुमार चौधरी को गिरफ्तार कर लिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। गिरफ्तार अपराधी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य कई डिजिटल सबूत बरामद किए गए हैं।
फर्जी सिम कार्ड का खेल
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सूरज कुमार चौधरी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम कार्ड जारी करता था और उन्हें साइबर अपराधियों के गिरोह को बेच देता था। इन्हीं सिम कार्ड्स का इस्तेमाल कर अपराधी अपनी पहचान छिपाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सीआईडी अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए आगे की जांच कर रही है। उम्मीद है कि इस मामले में जल्द ही और भी गिरफ्तारियां होंगी।


