
मां दुर्गा: श्यामपुर का शिव शक्ति धाम, जहां आस्था का दीप 25 वर्षों से जल रहा है, नवरात्रि में भक्तों को कर रहा है आकर्षित।
सुल्तानगंज। प्रखंड के कुमैठा पंचायत के श्यामपुर में स्थित शिव शक्ति धाम मंदिर, जहां जगत जननी मां जगदंबा की विशेष पूजा-अर्चना नवरात्रि के अवसर पर की जाती है, आस्था का एक अनूठा केंद्र बन गया है। यह मंदिर दक्षिणेश्वरी महामाया महागौरी मनमोहिनी मैया के नाम से भी जाना जाता है, और मां अपने अलौकिक व दिव्य रूप में विराजमान हैं, जिनकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पिछले 25 वर्षों से एक अखंड दीप प्रज्वलित है, जिसकी लौ कभी बुझी नहीं। इस दीप को प्रज्वलित रखने के लिए प्रति माह 50 किलो से अधिक शुद्ध घी की खपत होती है, जो भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रमाण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
श्यामपुर में मां दुर्गा का दिव्य दरबार
मां दक्षिणेश्वरी महामाया महागौरी मंदिर में प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है। मंदिर के पुजारी, पंडित आशुतोष झा, जो लाल बाबा के नाम से भी प्रसिद्ध हैं, नित्य दिन मां दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ करते हैं। यह उनका दैनिक अनुष्ठान है, जिसके पूर्ण होने के बाद ही वे अन्न-जल ग्रहण करते हैं। लाल बाबा की तमन्ना है कि वे मैया के दरबार को चांदी से बनवाएंगे। मंदिर के विकास के लिए ग्रामीण भी पूरी तत्परता से जुटे रहते हैं, जो इस पवित्र स्थल के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है।
मंदिर की स्थापना का इतिहास
मंदिर के संस्थापक एवं पुजारी आशुतोष झा, जो कभी पटना सचिवालय में लेखाकार के पद पर कार्यरत थे, बताते हैं कि उनकी मां, अंबू देवी, मां दुर्गा की परम भक्त थीं और वे उन्हें हमेशा मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रेरित करती रहती थीं। मां दुर्गा द्वारा बार-बार उन्हें स्वप्न में प्रतिमा स्थापना का आदेश मिलता था। इसी प्रेरणा से वर्ष 2001 में, उन्होंने पटना स्थित अपने आवास के तहखाने में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की और अखंड दीप प्रज्वलित किया।
आशुतोष झा 2017 में सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद, वे श्यामपुर कुमैठा में अपनी निजी जमीन पर मां दुर्गा का भव्य मंदिर निर्माण कराने के लिए आए। उन्होंने पटना से मां दुर्गा की प्रतिमा को घोड़े पर सवार कर श्यामपुर तक लाया, साथ ही अखंड दीप को भी पटना से यहां तक लाया गया, यह सुनिश्चित करते हुए कि वह बीच में बुझे नहीं। यहां उन्होंने अपनी निजी जमीन पर संगमरमर से बनी मां की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना प्रारंभ की। तब से लेकर आज तक वह अखंड दीप प्रज्वलित है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अखंड दीप: आस्था का प्रतीक
इस अखंड प्रज्वलित दीप में प्रतिमाह लगभग 40 से 50 किलो शुद्ध घी की खपत होती है। नवरात्रि के दिनों में, कई भक्त केवल जल पीकर व्रत रखते हैं, जो उनकी श्रद्धा का एक और रूप है। उनके फुफेरे भाई, मनोरंजन मिश्रा, बताते हैं कि आशुतोष झा ने अपना सारा सेवानिवृत्ति का पैसा मंदिर के निर्माण और संचालन में लगा दिया है, और उनकी पेंशन से ही यह दीप निरंतर जल रहा है।
हालांकि सरकार की नजर अभी तक इस मंदिर पर नहीं पड़ी है, लाल बाबा का दृढ़ संकल्प है कि जब तक वे जीवित हैं, यह दीप जलता रहेगा। उनकी मंशा है कि यह मंदिर पूरे भारत के मानचित्र पर बिहार, भागलपुर जिला और सुल्तानगंज प्रखंड का नाम रोशन करे। वे मानते हैं कि भविष्य में मां की कृपा से कोई और इस कार्य को आगे बढ़ाएगा। नवरात्रि के दौरान, सभी ग्रामीण बड़ी संख्या में आकर पूजा-अर्चना करते हैं। फूल कुमार झा, कुंदन झा, बलराम झा, लखन झा, अरविंद झा, प्रमोद झा, पवन झा सहित समस्त ग्रामीण मां की सेवा में तन, मन, और धन से सक्रिय रहते हैं।
भविष्य की ओर एक नज़र
श्यामपुर का यह शिव शक्ति धाम मंदिर आस्था, समर्पण और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। 25 वर्षों से निरंतर जलता हुआ अखंड दीप और भक्तों का उत्साह, इसे एक विशेष पहचान देता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
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