
Bihar AI Video: राजनीति के अखाड़े में अब तकनीक का नया दांव चला गया है, जहां एक पुराना वीडियो एआई के नए लिबास में लपेटकर सियासी गलियारों में भूचाल ला रहा है। बिहार की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो को लेकर बवाल मचा है, जिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बिहार एआई वीडियो विवाद: क्या है पूरा मामला?
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के सलाहकार दानिश रिज़वान ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। रिज़वान का आरोप है कि एक पुराने वीडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करके संपादित किया गया है और उसे सोशल मीडिया पर जानबूझकर वायरल किया जा रहा है। इस घटना ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है, और कई लोग इसे एक गहरी राजनीतिक साज़िश का हिस्सा मान रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
रिज़वान ने चुनाव आयोग, दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में यह शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी शिकायत में साफ तौर पर कहा है कि तेजस्वी यादव और मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस एडिटेड वीडियो को साझा किया है। उनका दावा है कि वीडियो में छेड़छाड़ की गई है ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके और जनता को गुमराह किया जा सके। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, चुनाव आयोग ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
आरोपों के बाद गरमाई बिहार की सियासत
यह आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब देश में लोकसभा चुनाव का माहौल अपने चरम पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के ‘फर्जी वीडियो’ का इस्तेमाल मतदाताओं को प्रभावित करने और विरोधियों को बदनाम करने के लिए किया जा सकता है। दानिश रिज़वान का कहना है कि यह केवल उनके व्यक्तिगत मानहानि का मामला नहीं है, बल्कि यह चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को भी खतरे में डालता है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की गहन जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आरजेडी और कांग्रेस की ओर से अभी तक इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि इस विवाद से बिहार की चुनावी राजनीति में नया मोड़ आ गया है। एआई के दुरुपयोग का यह मामला कई सवाल खड़े करता है कि क्या डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल अब राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए एक नए हथियार के तौर पर किया जा रहा है। इस मामले की जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






