
LPG Cylinder: जैसे किसी मेले में अपने के बिछड़ जाने का डर होता है, कुछ वैसा ही खौफ और अफरातफरी इन दिनों बिहार के जाले की गैस एजेंसियों पर देखने को मिल रहा है, जहां एक सिलेंडर के लिए लोगों को घंटों पसीना बहाना पड़ रहा है। नगर परिषद क्षेत्र में स्थित गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ कम होने का नाम ही नहीं ले रही है, जिससे आम लोगों की परेशानी जस की तस बनी हुई है।
देवी मां गैस एजेंसी के कार्यालय पर लगी लंबी कतारें इस समस्या की जीती-जागती तस्वीर बयां कर रही हैं। कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे धमाद गांव के एक उपभोक्ता ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उन्होंने ऑनलाइन बुकिंग तो करा ली, लेकिन 15 दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें डीएससी नंबर तक नहीं मिला है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसे में वे सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
क्यों भरनी पड़ रही है LPG Cylinder के लिए लंबी कतारें?
जब इस मामले पर एजेंसी के संचालक सोमेश मेहता से बात की गई, तो उन्होंने उपभोक्ताओं के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने बताया, “अक्सर जिन उपभोक्ताओं की ऑनलाइन बुकिंग किसी तकनीकी कारण से नहीं हो पाती या उनका डीएससी नंबर नहीं आता, वे सीधा एजेंसी पर ही गड़बड़ी का आरोप लगा देते हैं, जबकि इस पूरी प्रक्रिया में एजेंसी की कोई सीधी भूमिका नहीं होती है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एजेंसी की तरफ से होम डिलीवरी सुचारू रूप से चल रही है और गोदाम में फिलहाल 842 सिलेंडर उपलब्ध हैं, इसलिए सिलेंडर की कोई कमी नहीं है।
उनके अनुसार, इस भीड़ का मुख्य कारण सरकार द्वारा अनिवार्य किया गया केवाईसी (KYC) अपडेट और उन उपभोक्ताओं के कार्ड में सुधार है जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा, सरकार द्वारा निर्धारित गैस भराने के अंतराल को लेकर भी लोगों में भ्रम की स्थिति है। शहरी क्षेत्रों के लिए यह अंतराल 25-30 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन है, जिसे कई लोग नहीं समझ पा रहे हैं।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी और कालाबाजारी का खेल
वहीं, कटाई इंडेन गैस एजेंसी के प्रबंधक आदित्य कुमार ने इस भीड़ के पीछे एक और बड़ा कारण उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त कनेक्शन लेने वाले कई लाभार्थी नियमित रूप से गैस का इस्तेमाल ही नहीं करते। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब ऐसे लोग अचानक से गैस सिलेंडर का उठाव कर उसे बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
इसकी वजह से एजेंसी पर अनावश्यक दबाव बन रहा है और अक्सर हंगामे जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। इन लोगों की वजह से उन वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है, जिन्हें सच में सिलेंडर की जरूरत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। कुल मिलाकर, तकनीकी खामियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और योजना के दुरुपयोग ने मिलकर आम उपभोक्ता की रसोई का बजट और शांति, दोनों को बिगाड़ दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






