
India Defense Deals: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई गाथा लिखने और दुश्मनों के हर मंसूबे को ध्वस्त करने के लिए भारत ने अपनी सैन्य ताकत को अभूतपूर्व विस्तार देने का मार्ग प्रशस्त किया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 23 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा प्रस्तावों को अपनी मंजूरी दे दी है।
भारत की रक्षा शक्ति को मिला नया आयाम: DAC ने 23 लाख करोड़ के India Defense Deals को दी हरी झंडी
India Defense Deals: भारतीय वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण अधिग्रहण
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह अहम फैसला लिया गया। इन सौदों का मुख्य उद्देश्य भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाना है।
वायु सेना के लिए जिन प्रमुख प्रस्तावों को मंजूरी मिली है, वे इस प्रकार हैं:
- एस-400 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एसएएम) प्रणाली की खरीद, जो दुश्मन के हवाई हमलों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम है।
- सुखोई सु-30 एयरो इंजन एग्रीगेट्स का नवीनीकरण, जिससे सुखोई विमानों का सेवा जीवन बढ़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
- एएन32 और आईएल76 परिवहन बेड़े को बदलने के लिए मध्यम परिवहन विमानों को शामिल करना, जो आईएएफ की रणनीतिक परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करेंगे।
सूत्रों ने बताया कि रिमोटली पायलेटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट आक्रामक जवाबी कार्रवाई और समन्वित हवाई अभियानों को अंजाम देने में सक्षम बनाएंगे, साथ ही गुप्त खुफिया, निगरानी और पहचान गतिविधियों में भी सहायक होंगे। यह कदम देश की सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक मजबूत पहल है।
भारतीय सेना और तटरक्षक बल के लिए डीएसी की ऐतिहासिक मंजूरी
भारतीय सेना के लिए भी कई महत्वपूर्ण खरीद प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई है, जिनमें शामिल हैं:
- वायु रक्षा ट्रैक प्रणाली।
- बख्तरबंद भेदी टैंक गोला बारूद।
- उच्च क्षमता वाली रेडियो रिले प्रणाली।
- स्वदेशी रूप से विकसित धनुष गन प्रणाली।
- रनवे स्वतंत्र हवाई निगरानी प्रणाली।
तटरक्षक बल के लिए, डीएसी ने भारी-भरकम कुशन वाहन (होवरक्राफ्ट) के लिए आवश्यकता स्वीकृति (एओएन) प्रदान की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इन होवरक्राफ्ट का उपयोग बहुउद्देशीय समुद्री तटीय परिचालन भूमिकाओं के लिए किया जाएगा, जिसमें उच्च गति तटीय गश्त, टोही, खोज और बचाव अभियान, जहाजों को सहायता प्रदान करना और रसद सहित कर्मियों और सामानों का परिवहन करना शामिल है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, डीएसी ने 6.73 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 55 प्रस्तावों के लिए आवश्यकता स्वीकृति प्रदान की थी। इसके अतिरिक्त, चालू वित्तीय वर्ष में 2.28 लाख करोड़ रुपये के 503 प्रस्तावों के लिए पूंजीगत खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, अब तक दी गई आवश्यकता स्वीकृति और हस्ताक्षरित पूंजीगत अनुबंधों की मात्रा किसी भी वित्तीय वर्ष में सबसे अधिक है, जो देश की रक्षा तैयारियों और सैन्य आधुनिकीकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रकार की पहलें भारत की रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने और इसकी सुरक्षा को और सुदृढ़ करने में सहायक होंगी।




