
Dust Pollution: दिल्ली की हवा में घुली धूल सिर्फ कण नहीं, बल्कि एक अदृश्य राक्षस है, जो फेफड़ों पर हमला करता है। अब इस राक्षस पर लगाम कसने के लिए एक नया ब्रह्मास्त्र चला है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में Dust Pollution के गंभीर खतरे से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने कमर कस ली है। आयोग ने 1 अप्रैल, 2026 से निर्माण और विध्वंस गतिविधियों के लिए बेहद सख्त नियम लागू किए हैं। यह कदम एक ऐसे अध्ययन के बाद उठाया गया है, जिसमें पाया गया कि धूल प्रदूषण, सर्दियों में वायु गुणवत्ता के बिगाड़ने में लगभग 15% और गर्मियों में 27% तक का महत्वपूर्ण योगदान देता है। इन चौंकाने वाले आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए, CAQM ने धूल उत्पादन को सीमित करने और क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से ये नए, कड़े निर्देश जारी किए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Dust Pollution पर CAQM का नया प्रहार: क्या बदलेगी दिल्ली की हवा?
CAQM के सदस्य (तकनीकी) एस.डी. अत्री ने इस बात पर जोर दिया है कि विध्वंस से उत्पन्न धूल प्रदूषण एक प्रमुख स्रोत है, जिस पर कड़े नियंत्रण की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पहले विध्वंस कार्य अक्सर बिना पर्याप्त योजना या पूर्व सूचना के ही शुरू कर दिए जाते थे, जिसके परिणामस्वरूप धूल और मलबे का अनियंत्रित फैलाव होता था, जो पूरे क्षेत्र के वायु प्रदूषण में इज़ाफ़ा करता था। निर्देश संख्या 97, जो 2026 से प्रभावी है, के तहत 200 वर्ग मीटर से अधिक की सभी विध्वंस परियोजनाओं को उत्पन्न कचरे को निर्दिष्ट संग्रह केंद्रों पर जमा करना अनिवार्य होगा। इन केंद्रों को इस प्रकार व्यवस्थित किया जाएगा कि कम से कम एक केंद्र परियोजना स्थल के पांच किलोमीटर के दायरे में स्थित हो, ताकि मलबे का सुलभ और वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित किया जा सके।
विध्वंस से निपटना: कड़े नियम और ठोस योजना
नए नियमों में स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट किया गया है कि धूल के फैलाव को पूरी तरह से रोकने के लिए विध्वंस मलबे को ढके हुए वाहनों में ही ले जाया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, निर्माण या विध्वंस कार्य के लिए अधिभोग प्रमाण पत्र तभी जारी किया जाएगा जब अपशिष्ट निपटान का उचित प्रमाण प्रस्तुत किया जाएगा। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जो कचरा प्रबंधन में जवाबदेही सुनिश्चित करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
कचरा प्रबंधन और निगरानी: तकनीक का सहारा
प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए, एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जा रहा है, जो अपशिष्ट निपटान की रसीदें जारी करने और जीपीएस आधारित अपशिष्ट ट्रैकिंग को सुविधाजनक बनाएगा। अत्री ने बताया कि पानी का छिड़काव, धूल से बचाव के लिए उपयोग की जाने वाली विशेष स्क्रीन, प्रदूषण सेंसर और एंटी-स्मॉग गन सहित मौजूदा धूल नियंत्रण उपाय बड़े स्थलों पर अनिवार्य रूप से लागू रहेंगे। नियमित निरीक्षणों के माध्यम से इन नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली-एनसीआर में Dust Pollution पर प्रभावी ढंग से लगाम लगाई जा सके और निवासियों को स्वच्छ हवा का अधिकार मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






