
Bihar Board 10th Result: मेहनत की डुगडुगी बज चुकी है और सफलता का शोर अब दरभंगा की गलियों में गूंज रहा है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के मैट्रिक नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लगन और परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता, और इसी का जीता-जागता उदाहरण पेश किया है अलीनगर प्रखंड के होनहार छात्र-छात्राओं ने।
Bihar Board 10th Result में अलीनगर का जलवा
बिहार बोर्ड दसवीं के परीक्षा परिणाम घोषित होते ही दरभंगा जिले के अलीनगर प्रखंड में जश्न का माहौल बन गया। प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों के कई छात्र-छात्राओं ने 80 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर न केवल अपने माता-पिता बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन किया है।


इन सफल विद्यार्थियों के घरों पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और ग्रामीणों में खुशी का वातावरण है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस शानदार सफलता ने अन्य छात्रों को भी भविष्य में बेहतर करने के लिए प्रेरित किया है।इस साल की मैट्रिक परीक्षा में अपनी मेहनत का लोहा मनवाने वाले अलीनगर के कुछ प्रमुख छात्र-छात्राएं इस प्रकार हैं:
- मानित मुखिया: श्यामपुर गांव निवासी विजय मुखिया के पुत्र और उर्दू उत्क्रमित माध्यमिक स्कूल, अलीनगर के छात्र मानित ने 446 अंक प्राप्त कर प्रखंड में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
- मो. मुजम्मिल: असकौल गांव निवासी मो. हमीद के पुत्र और उत्क्रमित माध्यमिक स्कूल नरमा के छात्र मो. मुजम्मिल ने 428 अंक हासिल किए हैं।
- उम्मे सलमा: हरियठ गांव की रहने वाली मो. हक्कानी की पुत्री और उच्च माध्यमिक स्कूल हरियठ की छात्रा उम्मे सलमा ने 417 अंकों के साथ सफलता का परचम लहराया है।
- राजा बाबू: इमामगंज निवासी संजीत लाल देव के पुत्र राजा बाबू ने 414 अंक प्राप्त किए हैं।
- सोनी कुमारी: श्यामपुर गांव की ही रहने वाली प्रभू नारायण ठाकुर की पुत्री सोनी कुमारी ने 407 अंक हासिल कर अपने परिवार का मान बढ़ाया है।
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कोचिंग और सेल्फ-स्टडी का रहा मिला-जुला असर
इन सफल छात्रों में से कुछ ने अपनी सफलता का श्रेय विद्यालय की पढ़ाई के साथ-साथ ट्यूशन को भी दिया है। जानकारी के अनुसार, मानित मुखिया, राजा बाबू और सोनी कुमारी आइडियल क्लासेस इमामगंज में भी तैयारी करते थे। यह सफलता दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और छात्रों की अपनी लगन मिलकर किसी भी बड़े लक्ष्य को संभव बना सकती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। छात्रों की इस कामयाबी से पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।इन होनहारों की सफलता की कहानी सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कहानी है छोटे से गांव और सीमित संसाधनों के बीच सपनों को साकार करने की। इनके माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू और गर्व का भाव साफ देखा जा सकता है। यह परिणाम आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गया है।




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