
Bhagalpur News: भागलपुर की धरती एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहां जिंदगी देने वाले हाथ ही जिंदगी छीनने का सबब बन गए। एक छोटी सी लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को ऐसा जख्म दिया है, जो शायद कभी नहीं भरेगा। पीरपैंती से आई इस खबर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Bhagalpur News: गर्भपात ने ली जान! डॉक्टर की एक गलती और उजड़ गया परिवार, मायागंज में तोड़ा दम
जिले के पीरपैंती अंतर्गत दिलौड़ी कालीप्रसाद इलाके में एक महिला की गर्भपात के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका की पहचान पिंकी देवी के रूप में हुई है, जो लगभग तीन महीने की गर्भवती थीं। इस घटना के बाद मृतका के परिजनों ने स्थानीय डॉक्टर और एक आशा कार्यकर्ता पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया है। परिवार का आरोप है कि डॉक्टर की अनदेखी के कारण ही पिंकी की जान चली गई।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, पिंकी देवी के गर्भ में पल रहा भ्रूण खराब हो गया था, जिसे निकलवाने के लिए वे एक स्थानीय डॉक्टर के पास गए थे। बताया जा रहा है कि एक आशा कार्यकर्ता की मदद से गर्भपात की प्रक्रिया पूरी की गई और इसके बाद पिंकी को घर भेज दिया गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद पिंकी के पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया, जिसके बाद परिवार वाले उसे लेकर दोबारा उसी डॉक्टर के पास भागे।
Bhagalpur News: डॉक्टर ने गैस का दर्द बताकर किया रेफर
मृतका के भाई ने बताया कि जब वे अपनी बहन को लेकर दोबारा क्लिनिक पहुंचे, तो डॉक्टर ने इसे मामूली गैस की समस्या बताकर टाल दिया। जब पिंकी की हालत लगातार बिगड़ने लगी और दर्द बर्दाश्त से बाहर हो गया, तब जाकर डॉक्टर ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मरीज को मायागंज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। यह लापरवाही का आरोप परिवार वालों के लिए सबसे बड़ा सदमा है। परिजन आनन-फानन में पिंकी को लेकर मायागंज अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। वहां मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद पिंकी देवी को मृत घोषित कर दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, न्याय की गुहार
पिंकी की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। घर के चिराग के बुझ जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने इस पूरी घटना के लिए सीधे तौर पर स्थानीय डॉक्टर और आशा कार्यकर्ता को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि अगर डॉक्टर समय पर सही इलाज करते या सही सलाह देते तो पिंकी की जान बचाई जा सकती थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस मामले ने स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है।
फिलहाल, पीड़ित परिवार ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। अब देखना यह होगा कि इस जांच में क्या सामने आता है और क्या पिंकी के परिवार को इंसाफ मिल पाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह घटना उन अनगिनत मामलों में से एक है जहां ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और लापरवाही लोगों की जान ले लेती है।


