
Bhagalpur News: स्कूल की थाली में परोसे गए भोजन पर ऐसा बखेड़ा खड़ा हुआ कि बात सीधे जिलाधिकारी तक पहुँच गई। आनन-फानन में पूरा प्रशासनिक अमला अस्पताल की ओर दौड़ पड़ा। जगदीशपुर के गंगोता मैदान स्थित प्राथमिक विद्यालय में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मध्याह्न भोजन करने के बाद करीब 15 बच्चों ने असहज महसूस करने की शिकायत की। इसके तुरंत बाद सभी बच्चों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) डॉ. नवल किशोर चौधरी खुद बच्चों का हाल-चाल जानने सदर अस्पताल पहुँचे।
Bhagalpur News: आखिर कैसे बिगड़ी बच्चों की तबीयत?
जानकारी के अनुसार, सोमवार को पहली बार एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के माध्यम से भागलपुर के 157 विद्यालयों में भोजन की आपूर्ति की गई थी। इनमें से केवल जगदीशपुर के इसी विद्यालय से बच्चों के बीमार होने की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि स्कूल के 125 बच्चों ने खाना खाया था, लेकिन सिर्फ 15 बच्चों ने ही तबीयत खराब होने की बात कही। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अस्पताल पहुंचने पर बच्चों का प्राथमिक उपचार किया गया। राहत की बात यह रही कि किसी भी बच्चे को उल्टी या पेट दर्द जैसी गंभीर शिकायत नहीं थी। अधिकांश बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
DM ने फूड पॉइजनिंग की आशंका से किया इनकार
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, जो स्वयं एक चिकित्सक भी हैं, ने बच्चों का हाल जानने के बाद फूड पॉइजनिंग की आशंका को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “प्रथम दृष्टया यह फूड पॉइजनिंग का मामला नहीं लगता है। फूड पॉइजनिंग के लक्षणों में उल्टी और पेट में तेज दर्द शामिल होता है, जबकि इन बच्चों में से किसी को भी ऐसी कोई शिकायत नहीं है।” अस्पताल में भर्ती एक बच्ची ने सिरदर्द की शिकायत की, जिसका इलाज किया जा रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिलाधिकारी के पहुँचने से पहले ही अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) और जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा भी अस्पताल में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। इस घटना ने स्कूल में दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले की जांच के लिए टीम गठित
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मामले की पूरी तरह से छानबीन की जाएगी। इसके लिए एक जांच टीम का गठन किया जाएगा, जिसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी, डीपीओ एमडीएम और अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) को शामिल किया गया है। यह टीम इस बात का पता लगाएगी कि आखिर बच्चों की तबीयत बिगड़ने का असली कारण क्या था। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह घटना उस मिड-डे मील योजना पर भी ध्यान आकर्षित करती है जिसका उद्देश्य बच्चों को पोषण प्रदान करना है।


